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एंडोस्कोपी बंद 11 की मौत

7 वर्ष पहले
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मेकाजमें हर दिन पेट के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। मेकाज और निजी हास्पिटल में एंडोस्कोपी की सुविधा नहीं मिलने से मरीजों को 300 किमी दूरी तय कर रायपुर या विशाखापट्टनम की दौड़ लगानी पड़ रही है। जिसके चलते मरीजों को शारीरिक कष्ट के साथ आर्थिक परेशानी उठानी पड़ रही है। इससे जूझ रहे लोगों को राहत देने के लिए मेकाज प्रबंधन अब तक मशीन सुधरवाने कोई उपाय नहीं कर पाया है।

मेकाज प्रबंधन की इस लापरवाही का खामियाजा सबसे बीजापुर कोंटा सुकमा से अाए मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। एंडोस्कोपी के माध्यम से पेट के अंदर की सभी बीमारियों जैसे अल्सर, लीवर फंक्शन, कैंसर, आहार नली की जांच की जाती है। इसके माध्यम से लोगों को सही जानकारी मिलती है जिससे इलाज में सुविधा होती है। डाॅक्टरों को मशीन के अभाव में कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिलने से ड्रिप चढ़वाने तक ही सीमित हैं।

नई मशीन का प्रस्ताव भेजा गया

एंडोस्कोपीप्रभारी डाॅ. नवीन दुल्हानी ने बताया कि मेकाज की इंडोस्कोपी मशीन को सुधारने के लिए कंपनी के कर्मचारी नहीं रहे हैं। इसमें मेकाज प्रबंधन की कोई लापरवाही नहीं है। नई मशीन के लिए प्रस्ताव बनाकर भेज दिया गया है। उम्मीद है जल्द ही इसका लाभ बस्तरियों को मिलेगा।

इनका कहना है

{बीजापुर से पेट की जांच को लेकर मेकाज पहुंचे अनिरुद्ध कुमार ने बताया कि उन्हें पिछले कई महीनों से पीलिया की शिकायत है। सोनोग्राफी की जांच में लीवर की सही स्थिति का पता नहीं चल पाया। डाॅक्टर की राय पर वे एंडोस्कोपी के लिए यहां पर आए थे, लेकिन यहां मशीन बंद होने के चलते वे रायपुर तक की दौड़ लगाएंगे।

{ कुम्हारपारा निवासी कमलेश ने बताया कि उनकी माता कई दिनों से बीमार थीं। 18 सितंबर को उनको महारानी हास्पिटल में भर्ती करवाया गया। जहां उपचार कर रहे डाॅक्टर ने एंडोस्कोपी जांच के बिना सही उपचार नहीं होने की बात कही। नतीजतन उनके परिवार वाले उन्हें विशाखापट्टनम लेकर गए। जहां जांच के बाद सही उपचार मिलने से उनकी हालत अब बेहतर है।