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बच्चों के लिए ज्यादा एंटीबायोटिक है घातक

7 वर्ष पहले
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बच्चाअगर बीमार है तो खुद डॉक्टर बनकर उसे मनमाफिक दवा देने से बेहतर है कि डॉक्टर से उसका चेकअप करा लें। ज्यादा एंटीबायोटिक बच्चों के लिए बेहद घातक है, इससे बचने की कोशिश करें। भारतीय शिशु अकादमी की छत्तीसगढ़ शाखा की ओर से वीआईपी रोड स्थित एक होटल में आयोजित नेशनल वर्कशॉप में मौजूद एक्सपर्ट्स ने ये जानकारी दी। चाइल्ड डिसीज और एंटीबायोटिक पर आयोजित वर्कशॉप का रविवार को समापन हुआ। इसमें देश के बड़े शहरों के शिशु रोग विशेषज्ञों ने बच्चों को होने वाली संक्रामक बीमारियों और उनके इलाज के सही तरीकों की जानकारी दी। कार्यक्रम में मुंबई से भारतीय शिशु अकादमी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ विजय येवले, पूर्व अध्यक्ष डॉ नितिन शाह, डॉ राजू शाह, डॉ रोहित अग्रवाल, डॉ अनूप वर्मा, डॉ जयेश कावडिय़ा, डॉ अरुण अग्रवाल और मेकाहारा शिशु रोग विभाग के प्रमुख चिकित्सक मौजूद रहे।

बीमारियांऔर उनके लक्षण : एक्सपर्ट्सने बताया कि ऐसे संक्रामक रोग जो बच्चों को अपना निशाना बनाते हैं उनमें टायफाइड, हेपेटाइटिस ए, पीलिया, डेंगू, मलेरिया और निमोनिया जैसी बीमारियां शामिल हैं। इनकी गिरफ्त में आते ही बच्चों को खांसी, बुखार, कमजोरी, खाने में रुचि लेना और चिड़चिड़ापन देखने को मिलता है। ऐसी स्थिति में उनका तुरंत चेकअप कराएं।

सफाईका रखें खास ख्याल

विशेषज्ञोंने बताया कि बच्चा जब बीमार हो तब घर के आसपास सफाई का खास ख्याल रखें। बच्चे को अपने आप एंटीबायोटिक या इंजेक्शन कतई दें। इससे बीमारी थोड़ी देर के लिए कम जरूर हो जाती है, पर पूरी तरह ठीक नहीं होती।