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प्रमुख सचिव से नोटिस मिलने के बाद एपीडी ने शुरू करवाई जांच
डीबीस्टार ने 19 अगस्त को एचआईवी टेेस्ट किट खुले में छोड़ा, जांच रिपोर्ट पर उठेगा सवाल शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसमें स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा एचआईवी जांच के अभियान में लापरवाही बरते जाने का खुलासा किया गया था। एचआईवी जांच के लिए डिपार्टमेंट ऑफ एड्स कंट्रोल (पूर्व में नाको) से किट की सप्लाई हुई लेकिन उसे खुले में रख दिया गया।
विभाग द्वारा सेंट्रल लेवल पर किट की खरीदी कर प्रदेश में सप्लाई की गई। साथ ही प्रदेश शासन ने भी योजना में तेजी दिखाई तो एनआरएचएम से एक लाख किट की सप्लाई हो गई। इन्हें प्रदेश के सभी 111 आईसीटीसी सेंटर पर भेजना था। छत्तीसगढ़ राज्य एड्स नियंत्रण समिति के कर्मचारियों ने बताया कि किट दो से आठ डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखना है लेकिन दिल्ली से सप्लाई किट को चार-पांच दिन खुले में छोड़ दिया गया।
टीम ने जब सांख्यिकी अधिकारी विजय सिंह ठाकुर से बात की तो कहने लगे, केवल सात-आठ घंटे के लिए किट बाहर रखी थी। इनकी जांच रायपुर मेडिकल कॉलेज लैब में करवाई गई है। जबकि कॉलेज के अधिकारी ऐसी किसी जांच से इनकार कर रहे थे। उनका कहना था कि मेडिकल कॉलेज की लैब में सिर्फ ब्लड सैंपल की जांच होती है, किट का परीक्षण क्षेत्रीय कार्यालय कोलकाता में होता है।
खबर प्रकाशित होने के बाद स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने प्रकरण की जांच के निर्देश दिए। इस पर विभागीय अधिकारी लीपापोती में जुट गए हैं। अतिरिक्त परियोजना निदेशक डॉ. एसके बिंझवार कह रहे हैं कि किट फ्रीज में रखने के बाद खाली हुए डिब्बे बाहर फेंके गए थे। जब उन्हें बताया कि सांख्यिकी अधिकारी 5-6 घंटे तक किट बाहर रखने की बात कह रहे थे तो बोले, उन्हें भी नोटिस देकर जवाब मांगा है। मेडिकल कॉलेज में हुए टेस्ट की रिपोर्ट िमल गई है।
^स्टोर प्रभारी से भी पूछ रहे हैं
किटफ्रीज में रखने के बाद खाली डिब्बों को बाहर फेंका गया था। किट की जांच भी करवाई गई थी। मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर की रिपोर्ट मेरे पास है। आपने जब पूछा होगा तो डॉक्टर को समझ नहीं आया होगा। अधिकारियों को नोटिस दिया है, दो के जवाब गए हैं। स्टोर प्रभारी को भी बुलाकर पूछ रहे हैं। डॉ.एसके बिंझवार, एपीडी,सीजीसैक्स
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