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दुकानें कब और कितने में बनीं निगमायुक्त ने शुरू की जांच

7 वर्ष पहले
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डीबीस्टार ने 12 सितंबर को दुकान के लिए पार्षद पति पर पैसे लेने का आरोप लगा रहे व्यापारी और 16 सितंबर को योजना के तहत बनी दुकानों की जांच के लिए निगमायुक्त ने मंगवाई फाइल शीर्षक से खबरें प्रकाशित की थीं। इनमें बताया गया था िक खमतराई ओवरब्रिज के नीचे मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना के तहत बनी दुकानों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।

दुकानों के बाहर निगम के बाजार विभाग की ओर से नोटिस लगाया गया है कि प्रीमियम की बकाया राशि नहीं देने पर आवंटन रद्द कर देंगे। जबकि दुकान संचालकों का कहना है कि दुकान बनाने के लिए उनसे 50-50 हजार रुपए लिए गए हैं। रमण मंदिर वार्ड की पार्षद के पति घनश्याम तिवारी ने यह पैसा लिया था। इसमें से 10 हजार रुपए की रसीद बाजार विभाग से दी गई थी। घनश्याम तिवारी का भी कहना था कि विस्थापन के तहत ये दुकानें व्यापारियों के पैसे से बनी हैं।

खबर प्रकाशित होने के बाद नगर निगम आयुक्त अवनीश कुमार शरण ने बाजार विभाग के उपायुक्त लवकुश सिंगरौल से दुकानों की फाइल मंगवाई। वे देख रहे हैं कि मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना के तहत खमतराई में कितनी दुकानें बनी थीं। निगम ने इन्हें कितने की लागत से और कब बनवाया था। दुकानें किसके नाम पर अलॉट हुई थीं। दस्तावेजों की जांच के बाद जिनके नाम से दुकान आवंटित है, उनसे पूछताछ होगी कि उन्होंने पार्षद पति को पैसे क्यों दिए थे।

Follow-up

मैं खुद जांच कर रहा हूं

नगर निगम दुकान बनाने के लिए व्यापारियों से पैसे नहीं लेता है। इस मामले की जांच मैं खुद कर रहा हूं। बाजार विभाग के डिप्टी कमिश्नर से वहां की फाइल मंगवाई है। जांच के दौरान देखा जाएगा कि स्वावलंबन योजना के तहत दुकानें कितने की लागत में बनी और किसे अलॉट हुई थी। इसके बाद आगे की कार्रवाई करेंगे। अवनीशकुमार शरण, आयुक्त,रायपुर नगर निगम