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साइन बोर्ड लगाने में हुई गड़बड़ी की जांच करेंगे थाना प्रभारी

7 वर्ष पहले
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डीबीस्टार ने 9 सितंबर 2011 को मर्जी से निविदा जारी, सामान लगाया लोकल शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसमें बताया गया था कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में आगंतुकों की सुविधा के लिए साइन बोर्ड लगवाने में जमकर गड़बड़ी की गई। टेंडर जारी करने से लेकर सामग्री खरीदी तक में नियमों का खुला उल्लंघन हुआ।

साइन बोर्ड में ब्रांडेड की जगह लोकल रेडियम लगवाया गया तो सीएसआईडीसी से इसकी मंजूरी भी नहीं ली गई। प्रबंधन ने पहले निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली, इसके बाद विश्वविद्यालय केंद्रीय समिति की बैठक बुलाई। इसके बाद भी छत्तीसगढ़ शासन के भंडार क्रय नियमों का पालन नहीं किया गया। विश्वविद्यालय द्वारा रेटरो साइन बोर्ड के लिए मार्च 2010 में निविदा जारी की गई।

22 लाख रुपए से अधिक का यह काम 25 मार्च को बाबजी इंडस्ट्रियल इंटरप्राइजेस को दिया गया। समिति की बैठक में तय हुआ था कि डिस्प्ले बोर्ड का फाउंडेशन ग्रीन थ्री एम, एवरीडेनिशन ब्रांडेड कंपनी के लगाए जाएंगे और सफेद रेडियम, रेटरो ही होने चाहिए। जबकि हकीकत में यहां लोकल उत्पाद लगवाए गए हैं, जिनका सैंपल निर्धारित ब्रांड के मानकों से मेल नहीं खा रहा था।

सीएसअाईडीसी रेट कॉन्ट्रेक्ट से अधिक पर खरीदी हुई थी। पूरे मामले पर सीएसअाईडीसी के अधिकारियों का कहना था कि विवि ने उनसे संपर्क नहीं किया। विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि ब्रांडेड के लिए एस्टीमेट बनाया गया था लेकिन इसकी बाध्यता नहीं रखी गई थी। खुलासे के बाद कोई कार्रवाई नहीं होने पर आरटीआई कार्यकर्ता आशीष सोनी प्रकरण कोर्ट ले गए। वहां से तेलीबांधा टीआई को प्रकरण की जांच कर एक महीने में रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया है।

^ जल्द जांच शुरू करेंगे

इंदिरागांधी कृषि विश्वविद्यालय में रेटरो साइन बोर्ड की जांच करने के लिए कोर्ट से आदेश आया है। उसकी प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। जांच के बाद रिपोर्ट कोर्ट में पेश करेंगे। राकेशबघेल, थानाप्रभारी, तेलीबांधा

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