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पीडब्लूडी फर्जीवाड़ा की जांच करने शासन ने बनाई समिति

7 वर्ष पहले
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भास्कर

पीडब्लूडीविभाग में भर्ती में फर्जीवाड़ा फूटने के बाद शासन ने मामले की जांच के लिए समिति बैठा दी है। समिति को तीन हफ्ते में रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए हैं। लेकिन समिति जांच से पहले ही विवादों में गई है। इधर जांच बैठाने के बाद ईएनसी कार्यालय ने एक संशोधन आदेश जारी कर नियुक्तियों को अस्थायी करार दिया है। नौकरी पाने वालों से यह भी कहा गया है कि त्यागपत्र देना चाहें तो एक माह का वेतन देकर जा सकते हैं।

ईएनसी दफ्तर के आदेश को फर्जीवाड़े से नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों के लिए निकाला गया रास्ता बताया जा रहा है। प्रमुख अभियंता डीके प्रधान की ओर से जारी संशोधित आदेश में कहा गया है कि किसी भी उम्मीदवार को एक महीने की तनख्वाह देकर उसकी सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं। यदि वे त्यागपत्र देना चाहेंगे तो विभाग को एक महीने का पूरा वेतन भत्ते सहित या तीन महीने पहले नोटिस देनी होगी। ऐसा करने पर यह रकम भू-राजस्व बकाया के तौर पर वसूल की जाएगी। मालूम हो कि पहले यही आदेश तीन महीने का निकाला गया था। जांच बैठाने के बाद से विभाग में हड़कंप है। विभाग के सचिव अनिल राय ने जांच समिति बनाई है। तीन सदस्यीय समिति में विभाग के उप सचिव एमएम मिंज, अवर सचिव सी तिर्की संयुक्त संचालक वित्त आरपी चौहान शामिल हैं। शासन ने समिति तो बना दी, लेकिन जांच के बिंदू तय नहीं किए हैं। उन्होंने विभाग में डाटा इंट्री आपरेटर, शीघ्रलेखक, स्टेनो टायपिस्ट सहायक ग्रेड-3 के पदों पर भर्ती में की गई गड़बड़ी और विसंगति की जांच करने को कहा है। इधर, जांच समिति की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।



पूरे मामले में जिन तीन अफसरों की भूमिका पर प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं उनमें जांच समिति में शामिल संयुक्त संचालक वित्त चौहान भी शामिल हैं। भर्ती से प्रभावित उम्मीदवारों और सेंटर आफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) ने चौहान को जांच समिति से हटाने की मांग की है।

सीधी भर्ती में गड़बड़ी चौहान के रहते ही - सीटू

सीटू के महासचिव अजीत लाल का कहना है कि सीधी भर्ती की पूरी प्रक्रिया चौहान के जरिए ही कराई गई है। इसमें कौशल परीक्षा भी शामिल है। अभ्यर्थियों की सीडी उत्तरपुस्तिका इन्हीं के सुपुर्द रही है। जबकि वे तो भर्ती कमेटी ते और ही प्रक्रिया से संबंधित स्थापना का काम उनके पास है। इसके बावजूद भर्ती की पूरी कमान उन्होंने अप