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- दैनिक भास्कर के प्राइड अवार्ड समारोह में अनुपम खेर के सम्बोधन से सब मंत्रमुग्ध
दैनिक भास्कर के प्राइड अवार्ड समारोह में अनुपम खेर के सम्बोधन से सब मंत्रमुग्ध
हार के जश्न से खुलेगी जीत की राह
प्रख्यातफिल्म अभिनेता अनुपम खेर ने छत्तीसगढ़ प्राइड अवार्ड के दौरान अपनी मोटिवेशनल स्पीच में सेंस ऑफ प्राइड (गर्व की अनुभूति) को ही केंद्र में रखा। सबको रोमांचित करनेवाले उद्बोधन में अनुपम खेर ने कहा कि गर्व को केवल आंखों और दिलों से ही महसूस कर सकते हैं। जैसे मां अपने बेटे के लिए महसूस करती है। उन्होंने कहा कि देश हर नागरिक ठीक इसी तरह अगर अपनी मातृभूमि को गौरवान्वित करने के एहसास के साथ काम करे तो दुनिया की कोई ताकत हमे बेहतर बनने से नहीं रोक सकती।
अनुपम खेर ने राष्ट्रीय स्वच्छता अभियान से अपनी बात शुरू की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने शुरुआत में कुछ लोगों को जोड़ा, फिर एक लड़ी बनी। आज पूरे देश ने प्रेरणा ले ली है। लिहाजा, कोई एक व्यक्ति देश या समाज को गौरवान्वित करने के लक्ष्य से काम शुरू करे तो पूरी चेन बनती है। देश को बेहतर बनाने की सोच आगे बढ़ जाती है। उन्होंने कहा िक अगर आप अच्छा काम कर रहे हैं तो फिक्र मत कीजिए। मेहनत का फल वाकई बेकार नहीं जाता। अगर आप ईमानदार हैं और मेहनत करते हैं, तो आपके सारे सपने जरूर पूरे होंगे, यह हो ही नहीं सकता कि आपके सपने पूरे हों।
हारको करिए सेलिब्रेट
अनुपमखेर ने कहा कि मैं आज भी वह दिन नहीं भूल सकता जब पिताजी ने मुझे होटल में पार्टी देने के बाद बताया कि मैं बोर्ड एग्जाम में फेल हो गया हूं। मैं चकित था, तब पिता ने कहा कि जीवन में यह जरूर याद रखना कि जब भी नाकाम हो, उस हार को सेलिब्रेट करना। अगर 16 साल का लड़का अपने पिता के साथ हार को सेलिब्रेट कर सकता है, तो वह जरूर आगे बढ़ेगा।
इनवेस्टकरें, रिटर्न तय
अनुपमखेर ने जीवन से जुड़े कुछ किस्से सुनाए, जो प्रेरणादायी थे। उन्होंने बताया कि जब मैं अपने पिता के साथ घूमने निकलता था तो लोग उन्हें रास्तेभर नमस्कार करते ते। मैंने राज पूछा, तो पिता ने बताया कि यह इनवेस्टमेंट है। जब मैं (पिता) 20 साल पहले शिमला आया तो छह माह तक सबको नमस्कार करता रहा। अब मैं जहां जाता हूं, सब मुझे नमस्कार करते हैं। अर्थात, आप जो भी इनवेस्ट करेंगे, उसका रिटर्न जरूर मिलेगा।
भीगगए तो बारिश का क्या डर
अनुपमखेर ने बताया कि स्ट्रगल के दौरान जब काम नहीं मिल रहा था तो मैंने दादाजी को चिट्ठी लिखी की शिमला लौटना चाहता हूं। उन्होंने जवाब दिया कि माता-पिता ने संघर्ष कर