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प्रॉमिस डे आज : लव स्टोरी की सीरिज में आज पढ़िए शंकर और पार्वती की कहानी, 24 साल से हैं साथ, मनाते हैं ईद और दीपावली
सिटी रिपोर्टर } शंकरके प्यार में सलमा पार्वती बन गई, तो शंकर भी नमाज पढ़ने लगे। प्यार की यह अनोखी दास्तान शुरू हुई 1989 में रेल्वे कॉलोनी से।
उस समय जब इंटर कास्ट मैरिज के बारे में सोचना गुनाह था, तब हिंदू-मुस्लिम विवाह तलवार की धार पर चलने से ज्यादा ही खतरनाक था। लेकिन शंकर और सलमा ने प्यार के लिए जान पर खेलना भी स्वीकार किया। जब घर से भागकर शादी की, तब घर वालों ने मुंह मोड़ लिया। रिश्तेदार ताने देते थे। आखिरकार प्यार की जीत हुई। आज शादी को 24 साल हो गए। दोनों परिवार मिलकर ईद और दीवाली मनाते हैं।
खतमें हुआ प्यार
1989में रेल्वे कॉलोनी में दोनों के परिवार में तीन पीढ़ियों की दोस्ती थी। दक्षिण भारतीय परिवार के शंकर एमएससी के बाद जॉब ढूंढ रहे थे और सलमा सेकंड ईयर में पढ़ रही थी। परिवार की दोस्ती और मेल जोल के बीच दोनों में प्यार हुआ। छोटी बहन के माध्यम से खत भेजकर दोनों ने इजहार किया। इसके बाद चिट्ठियों से ही इश्क परवान चढ़ा। घर वालों को पता चला, तो पहले उन्होंने समझाया, फिर सलमा की पढ़ाई छुड़वा दी।
1991 में इलेक्ट्रिक बोर्ड में जॉब के लिए शंकर कोंडागांव में थे। ट्रेनिंग के लिए रायपुर आए तो सलमा के रिश्ते की बात कहीं और चल रही थी। शंकर से शादी की इच्छा पर सलमा के घरवालों ने कहा कि उन्हें इस्लाम अपनाना होगा। सलमा जानती थी शंकर इकलौते बेटे हैं, उनकी मां पूजा पाठ वाली है, इसलिए यह संभव नहीं होगा। तब दोनों ने भागकर जगदलपुर के आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली। सलमा के घरवालों ने कई दिनों तक बेटी को वापस लाने की कोशिश की। लेकिन बात नहीं बनी, तो रिश्ता तोड़ दिया। इधर शंकर के घरवालों ने सलमा को पार्वती के रूप में स्वीकार कर लिया।
दो साल बाद उनके घर वाले भी मान गए। 24 साल से वे पूजा पाठ के साथ नमाज भी पढ़ती हैं। ईद मनाने मायके जाती हैं और दीवाली की तैयारी ससुराल में करती हैं। सास उन्हें बेटी मानती हैं और पति का प्यार ऐसा है कि हर एनिवर्सरी को यादगार बनाने के लिए उनके साथ फोटो जरूर खिंचवाते है। कॉलेज में पढ़ रहे शंकर और पार्वती के बेटा-बेटी भी दोनों धर्म के त्योहार मनाते हैं। पूजा करने के साथ नमाज भी पढ़ते हैं।
कब्रमें जाऊंगी चिता पर लेटूंगी, देह दान करूंगी
पार्वती(सलमा) कहती हैं, फर्क धर्म का नहीं सोच का है। हमने मजहब बनाए है पर जोड़ी तो ईश्वर बनाता है। मुझे लोग कहते थे, बच्चों की शादी में परेशानी आएगी, मैंने बच्चों को इतना काबिल बनाया है कि उन्हें कोई तकलीफ हो। मुझे कहा जाता था कि तुम दफनाई नहीं जाओगी वे लोग तुम्हें जला देंगे।
मैंने तय किया है कि मैं एम्स या मेडिकल कॉलेज को देह दान करूंगी। जलूंगी कब्र में जाऊंगी। बस किसी के काम आऊंगी। लोग लव जिहाद की बात करते हैं, लेकिन प्यार सच्चा हो तो जेहाद नहीं होता। शंकर आज भी उतने ही प्यारे और सिंपल है।
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valentine week
धर्म के आगे जीता प्यार, शंकर के लिए सलमा से बनी पार्वती