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शहर मेंे 20 हजार ऐसे मकान जिनके मालिक उन्हें खरीद-बेच नहीं सकते
राजधानीकी 50 से ज्यादा गृह निर्माण समितियों में मकान बनाकर रहनेवाले तकरीबन 20 हजार लोग बड़ी मुसीबत से घिर चुके हैं। इन सोसाइटियों में रहनेवालों को अब धीरे-धीरे पता चल रहा है कि पिछले 40-50 साल से जिन मकानों में वे रह रहे हैं, वह या उसका प्लाट ही सरकारी रिकार्ड में उनके नाम पर नहीं चढ़ पाया है। राजधानी की चौबे कालोनी और सुंदरनगर जैसे पॉश और महंगे लोकेशंस में रहनेवाले जब इन सोसाइटियों में मकान बेचने या खरीदने के लिए निकल रहे हैं, तब उन्हें पता चल रहा है कि सरकार ने चार साल पहले खामोशी से ऐसा नियम बना दिया, जिसके कारण उनकी प्रापर्टी की उनके नाम पर रजिस्ट्री ही नहीं हो सकती। जानकारों का कहना है कि यह नियम एक बड़े फर्जीवाड़े का सूत्रधार भी हो सकता है, क्योंकि रजिस्ट्री होने के कारण खरीदी-बिक्री ऐसे कागजों पर हो रही है जिनकी वैधानिक मान्यता ही नहीं है।
राजधानी की सुंदर नगर, चौबे कालोनी समेत कई बड़ी कालोनियों तथा गृह निर्माण सोसाइटियों में रहने वाले मकान मालिकों को अब जाकर पता चल रहा है कि 2009 में सरकार ने जो फैसला लिया था, उसने उन सभी को बड़ी परेशानी में डाल दिया है। सरकार की कैबिनेट ने तब निर्णय किया था कि सोसायटी और गृह निर्माण मंडल के सभी प्लाट धारकों की जमीन का नामांतरण राजस्व विभाग से कराना अनिवार्य है। इसके बाद ही मकान मालिक अपनी जमीन या मकान को बेच सकता है। रजिस्ट्री दफ्तर में नामांतरण की कापी देखने के बाद ही रजिस्ट्री होगी। परेशानी ये है कि 60 के दशक में जब लोगों ने जमीनें ली थीं, तब नामांतरण की अनिवार्यता का नियम नहीं था। शहर की कुछ बड़ी सोसाइटियां 60-70 के दशक में बनी थीं। तब सोसाइटी के पदाधिकारियों ने अलाटमेंट लेटर के आधार पर लोगों को प्लाट नंबर दे दिए थे। इसी आधार पर रजिस्ट्री भी हो गई। लोगों ने रजिस्ट्री पर निगम से नक्शा पास कराकर मकान बना लिए। वे संपत्ति कर और जल मल कर भी पटाने लगे। अलाटमेंट लेटर के आधार पर ही बैंकों ने होम लोन भी दे दिया, बिजली भी मिल गई। लेकिन नामांतरण के नए नियम ने अब सभी को मुश्किल में डाल दिया है।
लोगों की परेशानी पर प्रशासन की मुहर
यह था फैसला
2009में कैबिनेट ने निर्णय लिया कि सोसायटी और गृह निर्माण मंडल की जमीन का नामांतरण के बिना खरीदी बिक्री नहीं हो सकती है। सोसायटी के अलाटमेंट लेटर रजिस्ट्री तब तक मान्य नहीं होगा, जब तक कि नाम