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बस में पहले बैठने के लिए भिड़े कर्मचारी, किया हंगामा
बसमें पहले बैठने को लेकर गुरुवार को मंत्रालय और एचओडी दफ्तर के कर्मचारी भिड़ गए। दोनों संघों के कर्मचारी आमने-सामने हो गए और करीब एक घंटे तक प्रदर्शन और वाकयुद्ध चला। कर्मचारी सड़कों पर बैठ गए। हाय-हाय के नारे भी लगे। पुलिस फोर्स बुलानी पड़ी और उत्तेजित कर्मचारियों को धकेल कर पीछे हटाना पड़ा। सभी 67 बसें थमी रहीं। बाद में अफसरों की समझाइश के बाद ले देकर बसें रवाना कराई गईं।आरोप प्रत्यारोप के बीच कर्मचारी एक-दूसरे पर बस में ताश खेलने का आरोप भी लगाते रहे।
मंत्रालय से आज बसें रवाना होनी थीं तो उससे पहले उन्हें एनआरडीए दफ्तर के पीछे पार्क किया गया था। इस वजह से मंत्रालय दफ्तर के कर्मचारी पहले सवार हो गए। यह एचओडी के कर्मचारियों को नागवार गुजरा। क्योंकि पहले एचओडी के पास पार्किंग होती थी और वहां के कर्मचारी पहले बैठते थे। उपाध्यक्ष एसएस बजाज ने दोनों कार्यालयों के कर्मचारी संघों से कहा है कि वे यातायात की व्यवस्था के बारे में आपस में मिल बैठकर तय कर लें। शुक्रवार को 11 बजे दोनों संघों की बैठक है। वे जो समाधान सुझाएंगे उस पर विचार किया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक मुख्य सचिव विवेक ढांड ने चार्ज लेने के बाद एचओडी का निरीक्षण किया तब उन्होंने बसें वहां पार्क करने के आदेश दिए थे।
इस व्यवस्था को अचानक बदल दिया गया। बताया गया कि बसों का इंतजाम करना एनआरडीए का काम है जबकि उसका संचालन करना जीएडी की जिम्मेदारी है।
बताते हैं कि मंत्रालय के कर्मचारी मानते हैं कि वे पहले नया रायपुर में शिफ्ट हुए इस वजह से उनका बस में पहले बैठने का अधिकार है। उधर, एचओडी के कर्मचारी भी कुछ मानने-समझने को तैयार नहीं। एचओडी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष जितेंद्र ठाकुर ने घटना के एनआरडीए के अफसरों को जिम्मेदार बताया कि उन्होंने बिना सूचित किए यातायात इंतजाम में बदलाव किया।
मंत्रालयीन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष कीर्तिवर्धन उपाध्याय ने भी एनआरडीए को अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार बताते हुए आरोप लगाया कि वह सुझावों पर भी ध्यान नहीं देता।
बैठक आज -
इधर, एनआरडी का तर्क है कि कर्मचारियों के 67 बसें चलाई जा रहीं हैं जो जरूरत से करीब ढाई सौ सीटें इन बसों में अधिक हैं, लेकिन व्यवस्था मानने को कर्मचारी तैयार नहीं हैं।