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कमल विहार में रेल के डिब्बे जैसे प्लाट बांटे, लौटाने वालों की भीड़
रायपुरविकास प्राधिकरण (आरडीए) के ड्रीम प्रोजेक्ट कमल विहार में 50 से ज्यादा लोगों को ऐसे प्लाट आवंटित कर दिए गए, जिनकी चौड़ाई 20 से 25 फीट और गहराई (लंबाई) 75 फीट तक है। इसमें निर्माण करने के लिए प्लाट के दोनों ओर चौड़ाई में जगह भी छोड़नी होगी। पांच-पांच फीट जगह छोड़ने पर चौड़ाई सिर्फ 15 फीट बचेगी, जिसमें रेल के डिब्बों की तरह लाइन से ही कमरे बनाने होंगे। इन प्लाट्स से बेचैन लोग इन्हें लौटाने के लिए आरडीए पहुंच रहे हैं। उनका कहना है कि इतने महंगे प्लाट लेने के बावजूद अच्छा मकान नहीं बना सके तो निवेश बर्बाद हो जाएगा।
आरडीए को जो आवेदन मिले हैं, उनके अनुसार 1500 वर्गफीट के लगभग दस से अधिक प्लाट की चौड़ाई 25 फीट और गहराई 70 से 80 फीट के बीच है। इनको मकान बनाने के लिए चारों तरफ जगह भी छोड़नी है। ऐसी स्थिति में किस तरह से उस भूखंड पर मकान बनेगा। इसको लेकर लोग प्राधिकरण के दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं। आरडीए के अफसरों ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि प्लाट अलाट होने के बाद किसी भी स्थिति में रकम वापस नहीं होगी। इसका साफ मतलब यह हो गया है कि अगर आरडीए इन लोगों के आड शेप के प्लाट को एक्सचेंज नहीं करता है तो जमीन मालिक के पास रेल के डिब्बे के आकार में मकान बनाने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं बचेगा।
दफ्तर में बढ़ी पूछताछ
गुरुवार को भास्कर ने आड शेप के प्लाट हितग्राहियों के द्वारा लौटाने की खबर प्रकाशित की। दिनभर लोगों ने कमल विहार के प्लाटों के आकार के बारे में पूछताछ की। कारण यह है कि लाटरी में प्लाट मिलने के बाद अधिकांश लोगों ने प्लाट के आकार की तरफ ध्यान ही नहीं दिया था। कई ऐसे प्लाट हैं जो 2100 वर्गफीट के हैं, मगर उसकी चौड़ाई केवल 25 फीट है जबकि गहराई 80 से 90 फीट तक है। ऐसे बेमेल प्लाट में किसी भी तरह का मकान का ढांचा बनाना बड़ी दिक्कत भरा काम है।
कोट
- लोगों के आवेदन आए हैं। इन पर गौर किया जा रहा है। अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। ये सच है कि अलाटमेंट के बाद हितग्राही के पैसे वापस नहीं हो सकते हैं।
पुलक भट्टाचार्या
राजस्व अधिकारी
आरडीए
जल्द नई लाटरी
नएसिरे से प्लाटों के आबंटन का दौर आरडीए शुरु कर रहा है। कमल विहार में पहले ही जमीन काफी महंगी होने की वजह से आरडीए के बड़े प्लाट बिक नहीं रहे हैं। छोटे प्लाट बेमेल आकार के मिलने के बाद अब