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इसलिए परमात्मा की रचना अद्वितीय है : साध्वी मृगावती
रायपुर. जमीनमें अन्न उगाने के लिए मनुष्य बीज बोता है, उद्यान के पौधों की देखरेख करता है। ताकि पौधों को विकसित होने के लिए पर्याप्त जगह मिल सके। इतना ध्यान देने के बाद मनुष्य जमीन पर कचरे की कामना नहीं करता। वह इन स्थानों पर स्वस्थ फसल की इच्छा रखता है। यह बातें दादाबाड़ी की धर्मसभा में साध्वी मृगावती ने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा।
उन्होंने कहा कि पृथ्वी, जल, तेज, वायु जैसे तत्वों से मिलकर ईश्वर का स्वरूप गढ़ा गया है। इसलिए ईश्वर की रचना को अद्वितीय माना गया है। आचार्य मानतुंग ने परमात्मा के लिए अपनी भक्ति-भावना को एकाग्र चित्त होकर लगाया और भक्तामर स्त्रोत की रचना की। जब व्यक्ति अपने ईश्वर की अलौकिकता को निहारता है, तो ईश्वर के गुणों का प्रभाव मनुष्य पर दिखाई देने लगते हैं। मनुष्य में शुभ परमाणु पूंजी भूत रहते हैं और अशुभ तत्वों का विनाश हो जाता है।
मनुष्य को स्वयं में शुभ परमाणु का बीजारोपण करना चाहिए। तुच्छ कर्मों के भावों को निकाल कर श्रेष्ठ कर्म के भावों को जगह देनी चाहिए। मंदिर के नीलेश गोलछा ने जानकारी दी कि पिछले बारह दिनों से भक्तामर स्त्रोत के स्तवन पूजन की श्रृंखला साध्वी मृगावती की निश्रा में चल रहा है। चेन्नई के श्रेणिक नाहर ने मंत्र गान, भक्ति गान की प्रस्तुति दी। इस दौरान बारह वर्षीय दिव्यांश कोचर का बहुमान किया गया। इन्होंने आठ दिनों तक उपवास रखा है।
जैन दादाबाड़ी धर्मसभा में शामिल श्रद्धालुओं को दिया संदेश