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पंजीयन फार्म में बताई गई तारीख के पहले धान नहीं बेच सकेंगे किसान
किसानों को इस साल अपना धान बेचने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ सकती है। धान खरीदी के फर्जीवाड़ा को रोकने के लिए नियम कड़े कर रही है। इस बार किसानों से पंजीयन के समय ही पूछा जा रहा है कि वे अपना धान बेचने के लिए सोसाइटी में कब लाएंगे। किसान जिस तारीख को निर्धारित करेंगे, उसी तारीख या उसके बाद ही वे धान बेचने सकेंगे। यही नहीं इस बार किसानों को एक बार में ही अपना सारा धान लाना होगा, वे इसे पहले की तरह किस्तों में नहीं बेच पाएंगे।
प्रदेश में किसानों से धान खरीदने के लिए पहले से सोसाइटियों में पंजीयन कराया जा रहा है। 30 सितंबर तक सोसाइटियों में पंजीयन होगा। इसके बाद छूटे हुए किसानों की आपत्तियों का निराकरण तहसीलदार 15 अक्टूबर तक करेंगे। पंजीयन फार्म में किसानों से कई ऐसी जानकारियां भी मांगी जा रही है, जिनसे धान की फर्जी खरीदी को नियंत्रित करने की कोशिश की जाएगी। इस बार धान खरीदी 15 नवंबर के आसपास कराने पर विचार किया जा रहा है। धान खरीदी की तैयारी मार्कफेड ने शुरू कर दी है। अभी 200 करोड़ रुपए के बारदाने खरीद लिए गए हैं। पहली खेप में तीन करोड़ बारदाने प्रदेश में पहुंच गए हैं।
बोनस पर असमंजस बरकरार
इसबार मोटा धान का समर्थन मूल्य 1360 रुपए और पतले धान का 1400 रुपए रखा गया है। केंद्र सरकार ने धान पर बोनस देने की स्थिति में केवल 25 लाख टन धान खरीदी करने की शर्त रखी है, इसलिए राज्य सरकार ने अभी तक धान खरीदी का लक्ष्य तय नहीं किया है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने अपने बजट भाषण में हर साल धान पर 300 रुपए बोनस देने की घोषणा की है, लेकिन केंद्र सरकार के रवैये के कारण असमंजस की स्थिति बनी हुई है। हालांकि सरकार ऐसे विकल्पों पर भी विचार कर रही है, जिससे किसानों को प्रोत्साहन राशि भी मिल जाए और केंद्र की शर्त भी लागू हो जाए।