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सीटें बांटने में हर साल गड़बड़ी, 150 सीटों में दिया था 151 को दाखिला
राज्यमें डाक्टरी की सीटों के आवंटन में हर साल किसी किसी तरह की गड़बड़ी की जा रही है। दो साल पहले रायपुर मेडिकल कॉलेज में 150 सीटों पर 151 उम्मीदवारों को प्रवेश दे दिया गया था। इतनी बड़ी गड़बड़ी का अधिकारियों को पता भी नहीं चला। एक साल गुजरने के बाद परीक्षा के समय मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया ने आपत्ति की तब उथलपथल मची। काउंसिल ने एक अतिरिक्त स्टूडेंट को कॉलेज से निकालने का फरमान जारी किया था, लेकिन अफसर यह तय नहीं कर सके कि आखिर किसका दाखिला गलत हुआ है। बाद में एक टूर के दौरान महानदी में डूबकर एक छात्र की मौत हो गई। इससे छात्रों की संख्या सीटों के बराबर हो गई। रायपुर मेडिकल कॉलेज में एक अतिरिक्त स्टूडेंट का एडमिशन करने के दौरान काउंसिलिंग प्रभारी डॉ. सुमीत त्रिपाठी ही थे। उसी साल मेडिकल डेंटल में एडमिशन के लिए काउंसिलिंग की शुरुआत हुई थी।
मेडिकल में एक अतिरिक्त स्टूडेंट का एडमिशन गंभीर लापरवाही थी, लेकिन लापरवाह अधिकारियों पर कोई कार्रवाई ही नहीं की गई।
आज स्थल काउंसिलिंग मेडिकल कॉलेज में
मंगलवारको एमबीबीएस की खाली सीटों को भरने के लिए नेहरू कॉलेज में मैन्यूअल काउंसिलिंग होगी। बुधवार को डेंटल की खाली सीटों को भरा जाएगा। काउंसिलिंग दोपहर 12 बजे से शुरू होगा।
दूसरेराज्यों के उम्मीदवारों को दिया एडमिशन: पिछलेसाल दूसरे राज्यों फर्जी निवास प्रमाणपत्र वाले दर्जनभर से ज्यादा उम्मीदवारों को एडमिशन दे दिया गया। जबकि इस पर कई उम्मीदवारों ने भारी आपत्ति दर्ज कराई थी। मामला हाईकोर्ट में चल रहा है। अब तक फर्जी निवास प्रमाणपत्र बनवाकर रायगढ़ कॉलेज में एडमिशन लेने वाले दो छात्रों को कॉलेज से बर्खास्त कर चुके हंै।
वहीं एक छात्र का मामला अटक गया है। उन्हें बर्खास्तगी का नोटिस दिया जा चुका था, लेकिन उसके पिता ने पेंड्रा तहसील का निवास प्रमाणपत्र पेश कर दिया। बिलासपुर कलेक्टर से प्रमाणपत्र के बारे में जानकारी मांगी गई है, लेकिन अब तक जानकारी नहीं आई है।
ऐसे हुई गड़बड़ी
एक छात्रा ने पहले स्टेट कोटे के तहत एडमिशन लिया था। काउंसिलिंग के आखिरी चरण में इस छात्रा ने काउंसिलिंग अधिकारियों के सामने आल इंडिया कोटे के तहत एडमिशन का दावा किया। उसने एडमिशन की रसीद भी अधिकारियों के सामने पेश की। इसके बाद अधिकारियों ने छात्रा के स्टेट कोटे की सीट को खाली मानकर एक अन्य