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रविवि ने ऑनलाइन की दिक्कतें तो मानी लेकिन राहत के नाम पर चुप्पी

7 वर्ष पहले
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मुख्यपरीक्षा के आवेदन में छात्रों को राहत देने के लिए शुरू किया गया ऑनलाइन सिस्टम अब रविशंकर यूनिवर्सिटी के लिए गले की फांस बन गया है। दर्जनों छात्र रोजाना इस सिस्टम की शिकायत कर रहे हैं। विश्वविद्यालय के अफसरों ने भी मान लिया है कि ऑनलाइन आवेदन के सिस्टम में कुछ खामियां हैं। लेकिन छात्रों को राहत कैसे मिलेगी, इस बात पर रविवि प्रबंधन चुप है।

ऑनलाइन आवेदन की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय ने एक निजी कंपनी को दी है। सत्र 2013-14 में स्नातक पार्ट-1 के आवेदन के साथ इसकी शुरुआत हुई। पहली बार हुई इस व्यवस्था को लेकर कई खामियां सामने आई। तब विश्वविद्यालय ने कहा कि पहली बार यह व्यवस्था हाेने से थोड़ी दिक्कत हुई है। अगली बार सब कुछ ठीक रहेगा। कुछ महीने पहले सत्र 2014-15 के आवेदन को लेकर विवि में चर्चा हुई। यहां तय किया कि मुख्य परीक्षा में सभी कक्षाओं के आवेदन ऑनलाइन पद्धति से ही भराए जाएंगे। एक साथ सभी कक्षाओं के आवेदन भरने से छात्रों को परेशानी हो सकती थी, इस वजह से तीन चरणों में आवेदन भराने की अधिसूचना जारी हुई।25 नवंबर से स्नातक पार्ट-2 3 के आवेदन से इसकी शुरुआत हुई। तब से लेकर अब तक ऑनलाइन पद्धति को लेकर शिकायतों का अंबार लगा है। छात्रों को सुविधा देने के लिए शुरू की गई यह व्यवस्था उन्हें सिर्फ परेशानियां ही दे रही है। एक के बार एक परेशानी से छात्र जूझ रहे हैं। यही वजह है कि ऑनलाइन आवेदन में हो रही दिक्कतों को लेकर करीब करीब दस हजार छात्रों ने या तो फोन कर या फिर खुद विवि पहुंचकर शिकायतें की।

ये शिकायतें ज्यादा

{बिनाआवेदन सबमिट किए एकाउंट से फीस कट जाना।

{आवेदन किसी और का, प्रिंट किसी और के नाम से।

{बिना शुल्क जमा किए ही, आवेदन सबमिट।

{आवेदन वाली साइट ओपन होने में परेशानी।

{प्राइवेट में उम्र का बंधन देकर फार्म नहीं लेना।

0. फोटो हस्ताक्षर अपलोड करने में दिक्कत।

0. आवेदन करने के दौरान हेल्प लाइन से मदद नहीं।

^ऑनलाइन आवेदन में दिक्कतें रही हैं, इसे हम भी मान रहे हैं। इसे लगातार सुधारा भी जा रहा है। कंपनी के खिलाफ क्या होगा यह अभी नहीं कहा जा सकता। केकेचंद्राकर कुलसचिव,रविवि