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किराया विवाद निपटाएगा ट्रिब्यूनल, शीत सत्र में बिल

7 वर्ष पहले
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इसएक्ट के बाद अब आम आदमी को सिविल कोर्ट के चक्कर नहीं लगाने होंगे। ही सालों तक केस के फैसले का इंतजार करना होगा। ट्रिब्यूनल में तुरंत इसका फैसला होगा।

इसलिए पड़ी जरूरत

प्रदेशमें नए रेंट कंट्रोल एक्ट की जरूरत उस समय महसूस की गई, जब यहां के शहरों का तेजी से विकास हुआ और हो रहा है। बड़ी संख्या में लोग इन शहरों में रहने के लिए रहे हैं। उद्योग भी रेंट पर जमीन ले रहे है। ऐसे में इस तरह के विवाद तेजी से आने लगे हैं। आखिर सरकार ने बढ़ते मामले को देखते हुए यह फैसला लिया है।

अभी ये है स्थिति

अभीमकान या जमीन के किराए से जुड़े विवादों का निपटारा सिविल कोर्ट में होता है। यहां सभी तरह के मामले सुने जाते है। ऐसे में कोर्ट की लंबी पेंडेंसी के चक्कर में रेंट कंट्रोल से जुड़े मामले भी अटके रहते हैं। इनका सालों तक निपटारा नहीं हो पाता। बता दें कि अभी तक रेंट कंट्रोल से जुड़े मामलों को सुनवाई के लिए जिला स्तर पर ही एक अधिकारी नियुक्त किया जाता है, जिसके फैसले को पहले सेशन और बाद में हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।

इसके आदेश को सिर्फ सुप्रीम कोर्ट में किया जा सकेगा चैलेंज

ट्रिब्यूनल में सिविल कोर्ट के फैसलों को दी जा सकेगी चुनौती

भास्करन्यूज | रायपुर

मकानया फिर जमीन के किराए को लेकर बढ़ते विवाद को देखते हुए राज्य सरकार अब एक नया रेंट कंट्रोल एक्ट लाने जा रही है। इसके तहत एक ट्रिब्यूनल का गठन होगा। यह ट्रिब्यूनल रेंट (किराए) से जुड़े प्रदेशभर के उन सारे मामलों को सुनेगा, जो सालों से सिविल कोर्ट में पेंडिंग हैं। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में कैबिनेट की बैठक हुई। इसमें एक्ट को विधानसभा के शीतकालीन सत्र में लाने को मंजूरी दी गई है। नए रेंट कंट्रोल एक्ट के तहत बनने वाले इस ट्रिब्यूनल शेष|पेज10



मेंसिविल कोर्ट में होने वाले फैसलों को भी चुनौती दी जा सकेगी। यह एक सब-ज्यूडिशियल संस्था होगी, जिसके पास हाईकोर्ट के बराबर शक्तियां होगी। इस दौरान ट्रिब्यूनल के फैसले को सिर्फ सुप्रीम कोर्ट में ही चैलेंज किया जा सकेगा। बता दें कि प्रदेश में हाल ही में इस कानून को लेकर राज्य सरकार ने अध्यादेश जारी किया था। जिसे अमल पर तेजी से कार्रवाई भी चल रही है। दैनिक भास्कर ने सरकार द्वारा एक्ट में किए जाने वाले इस बदलाव की खबर 23 अगस्त को ही प्रकाशित