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सीधी बात

7 वर्ष पहले
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मेडिकल सीटों का घपला, शासन ने पलटा दाखिले रद्द करने का फैसला

मेडिकल डेंटल की ऑनलाइन काउंसिलिंग में गड़बड़ी करने वाला चिकित्सा शिक्षा विभाग बैकफुट पर गया है। तकरीबन तीन माह में तीन दौर की काउंसिलिंग के बाद गुरुवार को चिकित्सा शिक्षा विभाग ने अचानक दाखिले बंद किए और 73 एमबीबीएस तथा 12 बीडीएस छात्रों के या तो दाखिले रद्द किए या कालेज बदल दिए। दैनिक भास्कर ने जैसे ही इसका खुलासा किया, प्रदेशभर में बवाल मच गया। उम्मीदवारों ने मेडिकल सीटों के आवंटन में घोटाले के आरोप लगाए तो शासन सक्रिय हो गया। दो दिन के भीतर, शनिवार को पुरानी सूची थोड़े संशोधन के साथ फिर मान्य कर दी गई है। इस आधार पर जारी की गई नई सूची में एमबीबीएस के 468 तथा बीडीएस के 13 स्टूडेंट्स के नाम हैं। इसमें पुरानी सूची के दो एमबीबीएस दो डेंटल सीटों का आवंटन रद्द किया गया है। इसके अलावा दो नए उम्मीदवारों को मेडिकल सीट मिली है तथा दो का कॉलेज बदला है। इसके बावजूद, यह सवाल बरकरार है कि आखिर काउंसिलिंग अफसरों ने दो दिन पहले सूची में भारी फेरबदल आखिर क्यों किया था?

मेडिकल काउंसिलिंग में भारी गड़बड़ी से पूरे स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा राज्य के प्रशासनिक गलियारे में भी खलबली मच गई थी। शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग के पीएस डॉ. आलोक शुक्ला ने डीएमई प्रताप सिंह डिप्टी डीएमई डॉ. सुमीत त्रिपाठी को विवादित सूची जारी करने के लिए जमकर फटकारा था। इसके बाद पुरानी सूची पर दो दिन मंथन चला। आला अफसरों ने ऐसा रास्ता निकालने की ताकीद की थी कि जिनका दाखिला हो गया, उनका अहित हो। इस आधार पर लंबे एक्सरसाइज के बाद शनिवार की शाम नई सूची फिर जारी की गई। लेकिन पूरे मामले ने चिकित्सा शिक्षा विभाग और पीएमटी की काउंसिलिंग करनेवाले अफसरों की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठा दिए हैं। नई सूची में भी चार लोगों की सीटों में बदलाव क्यों हुए? इस सवाल का जवाब डीएमई डिप्टी डीएमई के पास नहीं है।

हाई रैंक वालों का चयन क्यों नही?

नईसूची में स्टेट में 115वीं रैंक वाली शिमाली पाटले 489वीं रैंक वाले धनंजय राठौर का नाम है। 6 सितंबर की विवादित सूची में इनका नाम नहीं था। दोनों को ही रायपुर में एमबीबीएस की सीट मिली है।

सवाल ये उठाया जा रहा है कि हाई रैंक था तो पहले चयन क्यों नहीं हुआ। अफसरों का कहना है कि इन्होंने एक च्वाइस ही भरी थी। लेकिन