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डाक्टरी की सरकारी सीटें प्राइवेट कॉलेज को देने से मचा बवाल

7 वर्ष पहले
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मेडिकलकॉलेज की सीटों के लिए हुई ऑनलाइन काउंसिलिंग में हुआ बवाल थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। इस साल की काउंसिलिंग में जहां पहले सूची को लेकर विवाद हुआ वहीं स्टेट कोटे की सीटों को मैनेजमेंट कोटे में तब्दील करने को लेकर उम्मीदवार प्रवेश एवं फीस विनियामक समितिके समक्ष पहुंच गए और शिकायत की।

उम्मीदवारों की शिकायत पर बुधवार को तकनीकी शिक्षा संचालनालय में हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज वीके श्रीवास्तव की अध्यक्षता में समिति की हुई। बैठक की शुरुआत में ही सत्यनारायण साहू, मयंक साहू और अविनाश गुप्ता ने समिति के पास लिखित में शिकायत दर्ज कराई कि पिछले साल की काउंसिलिंग में दुर्ग के चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज को राज्य कोटे की 33 सीटों को मैनेजमेंट कोटे की सीटों में तब्दील कर दिया गया था।

उन्होंने प्रिया गुप्ता के मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी गई गाइड लाइन का हवाला देते हुए कहा कि कॉलेज प्रबंधन ने 30 सितंबर का इंतजार नहीं किया और किसी को जानकारी दिए बिना ही स्टेट कोटे की सीटों को मैनेजमेंट कोटे में तब्दील कर एडमिशन भी दे दिया।



इसके अलावा एनआरआई सीटों पर पीएमटी रैंक से भर्ती करने के बजाय अपने नियमों से एडमिशन दे दिया। मैनेजमेंट कोटे की सीटों में एडमिशन देने के लिए दो महीने पहले ही परीक्षा आयोजित कर ली। प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति ने माना कि कोटे की सीटों के लिए समिति को सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन का पालन करना चाहिए था। इसके अलावा परीक्षा की मॉनिटरिंग राज्य सरकार या एएफआरसी से करवानी थी। जो की नहीं कराई गई। इसलिए समिति ने दुर्ग के इस मेडिकल कॉलेज को कारण बताओ नोटिस जारी करने का फैसला लिया है। कॉलेज को एक-दो दिनों में नोटिस जारी कर दी जाएगी। इस मामले में डीएमई से भी जवाब तलब होगा।

डेंटल कॉलेजों की भी शिकायत

एएफआरसीके पास डेंटल कॉलेजों की भी शिकायत की गई है। शिकायतकर्ताओं ने समिति को बताया कि पिछले साल रुंगटा समेत पांच कॉलेजों ने मैनेजमेंट कोटे की सीटों को भरने के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित की थी। काउंसिलिंग में नियमों का पालन नहीं करने पर चंदूलाल चंद्राकर समेत इन सभी पांच डेंटल कॉलेजों को भी नोटिस जारी की जा रही है।



नोटिस का जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।