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स्कूलों में 5 साल बाद ग्रेडिंग के आधार पर परीक्षा
स्कूलोंमें पांच साल बाद फिर से परीक्षाएं लेने की तैयारी शुरू हो गई है। शिक्षा विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारियों को इसके निर्देश दिए हैं।
40 लाख बच्चों की परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र और उत्तरपुस्तिकाएं छपवाने फंड जारी कर दिए गए हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री केदार कश्यप ने भास्कर को बताया कि बच्चों की पढ़ाई का मूल्यांकन बेहतर तरीके से हो इस वजह से परीक्षा प्रणाली फिर शुरू की जा रही है। शिक्षा का अधिकार कानून 2009 में लागू होने के बाद राज्य में परीक्षा प्रणाली खत्म कर दी गई थी। इसमें 6 से 14 साल के बच्चों को फेल नहीं करना था। उनका मूल्यांकन कर ग्रेडिंग दी जा रही है। इसके लिए ए-बी-सी-डी-ई ग्रेड तय हैं। बच्चा ग्रेड लाता है तो उसे अगली कक्षा के योग्य नहीं माना जाता। उसके बाद शिक्षक की जिम्मेदारी होती है कि वह ग्रेड के बच्चे का ग्रेड सुधारकर बाकी बच्चों के समकक्ष खड़ा करे। लेकिन शिक्षक इस ओर ध्यान दे रहे थे और बच्चे।
बिना ग्रेड सिस्टम का पालन किए ही बच्चों को मनमाने तरीके से अगली क्लास में भेजा जा रहा था। इस वजह से पालकों, बच्चों और शिक्षकों में परीक्षा या फेल होने का भय खत्म हो गया था। पालकों ने बच्चों पर ध्यान देना बंद कर दिया और शिक्षकों ने भी पढ़ाई को लेकर लापरवाही बरतना शुरू कर दिया था।
खासबात : ग्रेडके साथ सुधारात्मक टीप फॉर्मेटिव आंकलन में देनी होगी, इससे शिक्षक, छात्र पालक समझ जाएंगे कि कौन से विषय में ध्यान देने और मेहनत करने की जरूरत है। आंकलन नंबरों के आधार किया जाएगा लेकिन रिपोर्ट कार्ड में ग्रेड दर्शाया जाएगा
रिपोर्ट कार्ड यानी प्रगति पत्रक में विद्यार्थियों को बताना होगा कि वह भविष्य में क्या बनना चाहते हैं। रिपोर्ट कार्ड में स्कूल का नाम, विद्यार्थी का नाम, कक्षा, जन्मतिथि, माता का नाम, पिता का नाम, जाति, दाखिला क्रमांक, वर्तमान पता (निवास),ऊंचाई, वजन, रुचि का उल्लेख होगा। चित्रकला, साहित्य, सांस्कृतिक खेलकूद, होमवर्क, अनुशासन, स्वच्छता, समयबद्धता नियमितता की जानकारी भी होगी।
इस तरह होगा परीक्षा का सिस्टम
जनरलप्रमोशन खत्म कर परीक्षा लेने के फैसले के बाद शिक्षा विभाग ने प्राइमरी-मिडिल की परीक्षा का खाका बना लिया है। पहली से आठवीं तक तीन फॉर्मेटिव आंकलन के अलावा अर्धवार्षिक एवं वार्षिक परीक्षाएं होंगी। इंग्लिश मीडियम की तरह हर हफ्ते बच्चों के टेस्ट भी होंगे। परीक्षा का टाइम टेबल भी जारी होगा। इससे परीक्षा का माहौल बनेगा। टीचर, स्टूडेंट पेरेंट्स तीनों मिलकर परीक्षा की तैयारी करेंगे। नए फार्मूले में बच्चों का पहला फॉर्मेटिव आंकलन अगस्त में, दूसरा फॉर्मेटिव आंकलन अक्टूबर में होगा।
छमाही परीक्षाएं (अर्धवार्षिक) दिसंबर के दूसरे तीसरे सप्ताह में ली जाएंगी। तीसरा फॉर्मेटिव आंकलन फरवरी के दूसरे तीसरे हफ्ते में होगा।
अप्रैल के दूसरे तीसरे हफ्ते में वार्षिक परीक्षाएं होंगी। छमाही परीक्षा में 60 फीसदी कोर्स और वार्षिक परीक्षा में बाकी 40 प्रतिशत कोर्स शामिल किया जाएगा। अर्धवार्षिक वार्षिक दोनों परीक्षाएं लिखित में होंगी। पहली में लिखित मौखिक दोनों परीक्षाएं 25-25 नंबरों की होंगी। प्रथम, द्वितीय तृतीय फॉर्मेटिव आंकलन, अर्धवार्षिक वार्षिक परीक्षाओं में अंक 50-50 होंगे। मूल्यांकन के लिए शिक्षक डायरी, मूल्यांकन पंजी और रिपोर्ट कार्ड का उपयोग किया जाएगा।