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परेश रावल ने बयां की रिश्तों की अहमियत

7 वर्ष पहले
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पिताजो जड़ की तरह अपने से जुड़ी रिश्ते रूपी शाखाओं को थामे रखता है, उसके अहसासों को मंच पर उकेरा गया। रिश्तों की लाइव तस्वीर उकेरने वाला भी दिग्गज कलाकार परेश रावल रहा। मौका था डॉ अरुण सेन की याद में आयोजित संगीत समारोह का। इस कार्यक्रम में परेश रावल स्टारर नाटक डियर फादर का मंचन किया गया।

नोक-झोंकभरी कहानी

नाटकके स्क्रीन प्ले में इंस्पेक्टर तिवारी, एडवोकेट अजय मांकड़ के घर एक सुसाइड केस के इन्वेस्टिगेशन के लिए आता है। इन्वेस्टिगेशन के दौरान कहानी फ्लैशबैक में जाती है, जहां मनु भाई मांकड़ की उसके बेटे और बहू से छोटी-छोटी बातों पर तकरार दिखाई जाती है। कॉलेज में मैथ्स की टीचर मनु भाई की बहू अलका मांकड़ एक दिन घर आने में लेट हो जाती है, तो उसका ससुर जान-पहचान के सभी लोगों को फोन कर देता है। इस बात से इरिटेट होकर अजय और अलका पिता से बहस करना शुरू कर देते हैं। कुछ इसी तरह नजारे परिवार में रोजाना नजर आते हैं। क्योंकि बेटे-बहू को उनकी रोका-टोकी पसंद नहीं है। परेश रावल ने इंस्पेक्टर तिवारी और मनुभाई के डबल रोल निभाए। दोनों ही किरदारों में उनका अभिनय, संवाद अदायगी और कॉमिक टाइमिंग गजब की रही।

साउथ की कहानी का रीमेक दिमाग का दिवालियापन : परेश रावल

साउथ की कहानियों को लेकर जस का तस उठाकर फिल्में बनने के मामले पर परेश रावल ने कहा कि बनाने वालों के दिमाग का दिवालियापन ही है। उन्होंने बताया कि जो नाटक रायपुर की जनता ने देखा उस पर आशुतोष गोवारिकर फिल्म बनाने की तैयारी में हैं। जीवन की कठिनाइयों पर युवाओं को संदेश देते हुए परेश बोले कि मैं कभी भी डिप्रेस नहीं होता, चाहे जो हो जाए नो डिप्रेशन क्योंकि इससे कुछ होता नहीं है। मैंने कभी नसीब को भी नहीं कोसा। मैंने असफलता का एनालिसिस किया। उन्होंने सरदार पटेल का रोल और रोड टू संगम जैसी फिल्मों का अपना फेवरेट काम बताया।