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गुरु से छल भयावह होता है: आचार्य नंदकुमार

7 वर्ष पहले
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गुरु से छल भयावह होता है: आचार्य नंदकुमार

रायपुर| रोहणीपुरमके सांई मंदिर में ठाकुर परिवार की ओर से आयोजित भागवत कथा में आचार्य पं. नंदकुमार चौबे ने कहा कि मनुष्य जीवन में कई तरह के काम करता है। काम करने के लिए कहीं वह दबाव का उपयोग करता है, तो कहीं छल-कपट का। छल चाहे जिससे भी किया जाए लेकिन इसका परिणाम बुरा ही होता है। गुरु और माता-पिता से किया गए छल का परिणाम भयावह होता है।

जो व्यक्ति आप पर सबसे ज्यादा भरोसा करता है, उसके साथ छल करने का दंड अंतिम समय में भोगना ही पड़ता है। आचार्य जी ने कर्ण और परशुराम का उदाहरण देते हुए बताया कि कर्ण ने धर्नुविद्या प्राप्त करने के लिए परशुराम से झूठ कहा था कि वे ब्राम्हण हैं, और जब उनका झूठ परशुराम के सामन आया तो उन्होंने कर्ण को श्राप दिया कि तुम क्षत्रिय हो और तुमने झूठ बोलकर विद्या प्राप्त की है। यह विद्या तुम्हारे कभी काम नहीं आएगी। महाभारत में परशुराम के श्राप की वजह से ही कर्ण अपनी धर्नुविद्या भूल गए और मृत्यु को प्राप्त हुए।