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उपलब्धियां गिनाने के नाम पर दोनों ही प्रमुख पार्टियों के
उपलब्धियां गिनाने के नाम पर दोनों ही प्रमुख पार्टियों के पास ज्यादा कुछ है नहीं। दोनों एक-दूसरे को घेरने में लगी हैं।
पुरानी घोषणाओं को नए सिरे से सजाएंगे
नगरीय निकाय चुनाव के लिए दोनों पार्टियों को प्रत्याशी चयन में जितनी मशक्कत करनी पड़ रही है, उतनी ही घोषणा-पत्र तैयार करने में। कांग्रेस पांच साल तक रायपुर नगर निगम की सत्ता पर रही। उपलब्धियां गिनाने के नाम पर ज्यादा कुछ है नहीं। इसे मुद्दा बनाकर भाजपा हमेशा घेरती रही है। जितनी घोषणाएं हुईं, उतनी धरातल पर आई नहीं। उधर भाजपा हाल के दिनों में हुई कुछ घटनाओं के कारण घिर रही है। धान खरीदी का मुद्दा हो या बिलासपुर नसबंदी कांड। वैसे प्रदेश में सत्तारूढ़ पार्टी पर महापौर समेत अन्य पार्षद पूरे पांच साल तक सहयोग करने का आरोप लगाते रहे। अधूरी योजनाओं के लिए भी इसे ही जिम्मेदार बता रहे हैं। खैर, नए घोषणा-पत्र में भी अधिकतर पुराने मसले ही हावी रहेंगे। इनमें से कितने अमलीजामा पहन पाते हैं, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
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