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भ्रष्टाचार खत्म करने का इन्होंने उठाया है बीड़ा, आप भी दें साथ

7 वर्ष पहले
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सिविल लाइंस स्थित एंटी करप्शन ब्यूरो के कार्यालय में करें भ्रष्टाचारियों की शिकायत।

सिटीरिपोर्टर रायपुर

आजके समय में हर इंसान भ्रष्टाचार की समस्या का सताया हुआ है। कोई भ्रष्टाचार करने में मशगूल है, कोई भ्रष्ट लोगों का साथ दे रहा है, तो कोई चाहते हुए भी इसका हिस्सा बन रहा है। सरकारी से लेकर निजी तंत्र भी इससे अछूते नहीं हैं। इन तमाम बातों के बावजूद भी कुछ ऐसे लोग हैं जो भ्रष्टाचार के इस राक्षस को धूल चटाने के इरादे के साथ संघर्ष कर रहे हैं। कुछ ऐसे ही लोगों ने अपने अनुभव साझा किए हैं दैनिक भास्कर के साथ। किसी को कामयाबी मिली है तो किसी को अब भी जंग लग चुके सिस्टम में बदलाव की आस है। हर स्थिति में एक बात जो इनमें सिमिलर है, वो ये है कि देश को करप्शन फ्री बनाने के लिए इनका संघर्ष जारी है।

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रद्द करवाई गलत नियुक्ति

नियमों के खिलाफ साल 2012 में जांजगीर के वार्ड क्र. 5 में एक आंगनबाड़ी सहायिका की नियुक्ति कर दी गई। नियम ये था कि उसी वार्ड की रहने वाली महिला को ये पद दिया जाए। आवेदिका चमेली देवी के पति को इस बात का पता लगा। उन्होंने सूचना के अधिकार कानून के तहत मामले की जानकारी जुटाई और कलेक्टर न्यायालय में केस फाइल किया। डेढ़ साल तक सरकारी दफ्तर के चक्कर लगाने के बाद मामले में फैसला आया और पता चला कि लेन-देन करते हुए गलत नियुक्ति की गई। कोर्ट से दूसरी महिला की नियुक्ति को रद्द किया। हालांकि, इस मामले में पात्र आवेदकों को आज तक नियुक्त नहीं किया गया, इसके लिए चमेली देवी संघर्ष कर रही हैं।

इन्हें मिला नेशनल अवॉर्ड

राजेश बिस्सा शारीरिक रूप से विकलांगता के कारण दूसरों की नजरों में कमजोर हो सकते हैं, लेकिन इनके इरादे कमजोर नहीं हैं। साल 2008-09 में जो मामला इन्होंने उजागर किया उसके चलते इन्हें एक राष्ट्रीय समाचार चैनल और कुछ गैर सरकारी संगठनों की तरफ से नेशनल आरटीआई अवॉर्ड से नवाजा गया। इन्होंने 25 सौ करोड़ रूपए की सड़क परियोजना का पर्दाफाश किया था। सूचना के अधिकार से इन्हें जानकारी मिली की 1500 किमी की सड़क बनाई जानी है, लेकिन इसका एग्रीमेंट 25 सौ किमी के हिसाब से हुआ है। इस बात के सामने आते ही इस मसौदे को निरस्त किया गया।

करप्ट इंस्पेक्टर को पकड़वाया

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