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सोच का फर्क है वरना दोस्ती प्यार से कम नहीं

7 वर्ष पहले
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एकचिंगारी आग से कम नहीं होती, एक सादगी शृंगार से कम नहीं होती, ये तो सिर्फ सोच का फर्क है यारों, वर्ना दोस्ती भी प्यार से कम नहीं होती। अमरनाथ त्यागी ने जब यह कविता सुनाई तो लोग वाह-वाह कर उठे। सोमवार को जैतूसाव मठ में आयोजित काव्य गोष्ठी में राज्य के लगभग 35 कवियों ने कविता में काव्य के 9 रसों का बेहतरीन अंदाज में पिरोया।

जबचाहूं उगे सूरज, जब चाहूं रात हो...

कार्यक्रमके मुख्य अतिथि अंबर शुक्ला अमरीश ने अपनी कविता में कल्पना की ऐसी उड़ान भरी कि लोग सपनों के संसार में खो गए। उनकी कविता में मन ले चल मुझे उस दूर गगन में, चिंता-विपदा से परे मुक्त चमन में, जहां झरती है हंसी कल-कल, आंखों में ख्वाब हो, जब चाहूं उगे सूरज, जब चाहूं रात हो... सुनकर श्रोताओं को परी कथा-सा अहसास कराया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही कवयित्री लतिका भावे ने वीर शहीदों बारम्बार नतवंदन, वीर जवानों बारम्बार अभिवंदन, हे भारत मां के लाडलों तुम पर हमें अभिमान है... सुनाकर नक्सल हमले और कश्मीर में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

नेताओंपर कसा व्यंग्य लोगों ने लगाए ठहाके

कविएबी दुबे दीप्त ने जब कविता नाम गिनाएं हम किन-किन का, जिनकी गाड़ी में है तिनका, दिल का मैल धो पाए, विज्ञापन करते हैं विम का... सुनाई तो श्रोताओं ने जमकर ठहाके लगाए। कवियित्री उर्मिला देवी उर्मी ने जब से तुमको पाया सम्मान हुआ सवाया, सब आकर भरते हैं खाली जेब हमारी, कुर्सी रानी तुम सबसे प्यारी, सबसे प्यारी महिमा है तुम्हारी... सुनाकर नेताओं पर व्यंग्य बाण छोड़े।

कवि तेजपाल सोनी ने छत्तीसगढ़ी कविता घाम के बन अउ पांव में कुछु नहीं हे, घूमत हे मनखे करतिस का, रेता के नदिया, रेता के झरना, वो प्यास लगे ले करतिस का... सुनाकर सबका दिल जीता। इस मौक पर बड़ी संख्या में कविता प्रेमी माैजू रहे।