रेसिडेंट डाक्टरों के हास्टल अलग होंगे
रायपुर| मेडिकलकॉलेज के महिला पुरुष रेसीडेंट डॉक्टरों को आने वाले दिनों में अब एक होस्टल में रहना नहीं पड़ेगा। पीडब्ल्यूडी ने पीजी गर्ल्स होस्टल के लिए टेंडर जारी कर दिया है। होस्टल बनाने में देरी से नाराज डीन डॉ. एके चंद्राकर ने इसकी शिकायत स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला से की थी। उन्होंने कहा कि होस्टल बनने से पुरुष महिला डॉक्टर को एक ही बिल्डिंग में रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
डेढ़ साल पहले शासन ने पीजी गर्ल्स होस्टल के लिए साढ़े पांच करोड़ रुपए स्वीकृत किया था। मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया ने इस साल होस्टल की कमी के कारण एमबीबीएस की 50 सीटों को मान्यता देने से इनकार कर दिया था। बाद में शासन की पहल के बाद किसी तरह मान्यता मिली।
74 कमरे बनने हैं
नया होस्टल चार मंजिला होगा। इसमें 74 कमरे रहेंगे। एक कमरे में दो रेसीडेंट डॉक्टर रहेंगे। इस हिसाब से 148 डॉक्टर आसानी से रहने लगेंगे। आने वाले दिनों में पीजी की सीट बढ़ सकती है। इससे रेसीडेंट डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी और होस्टल की जरूरत बढ़ेगी। वर्तमान में यहां पीजी की 89 सीटें हैं। तीन साल के कोर्स के हिसाब से 267 रेसीडेंट डॉक्टर काम करते हैं।
महिला-पुरुष रेसीडेंट डॉक्टर एक ही बिल्डिंग में
होस्टल की कमी के कारण रेसीडेंट महिला पुरुष डॉक्टरों को एक ही बिल्डिंग में रहना पड़ रहा है। होस्टल की कमी को देखते हुए कॉलेज काउंसिल ने यह निर्णय हाल ही में लिया था। अब महिला रेसीडेंट डॉक्टरों को एक अक्टूबर तक होस्टल में शिफट होने को कहा गया है। हालांकि कुछ डाॅक्टर बिदक रहे हैं। कॉलेज में रेसीडेंट डॉक्टरों की संख्या 243 है। इनमें से आधे डॉक्टर आल इंडिया कोटा के हैं। इन डॉक्टरों के लिए होस्टल की कमी मान्यता में सबसे बड़ी बाधा बन रही है।