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अब साहित्य को गंभीरता का चोला उतारना होगा
सिर्फ एंटरटेन कर रहे हैं नए जमाने के लेखक
नए लेखकों ने कहा
बड़े साहित्यकारों ने कहा
लेखिका मैत्रेयी पुष्पा ने कहा, अगर मेरे जमाने में मोबाइल होता, तो प्रेम से भरा प्रेमी का मैसेज कब का डिलीट हो गया होता। शुक्र है तब प्रेम पत्र था। मैं और वो दोनों बूढ़े हो गए लेकिन प्रेम पत्र आज भी जवां है। यह बात युवा पीढ़ी को समझनी होगी कि किताब भले ही खो सकती है, बुक की तरह डिलीट नहीं हो सकती। अच्छी किताबें जीवन भर की साथी होती हैं। आज का साहित्य एंटरटेन कर सकता है, लेकिन मानवीय मूल्य नहीं दे सकता। पुष्पा ने कहा कि समाज की स्थिति तब सुधरेगी जब घर की खाप पंचायत खत्म होगी।
वुमनिया से ज्यादा अश्लील हैंै हमारे लोकगीत
गैंग्स ऑफ वासेपुर का गाना वुमनिया लिखने वाले वरुण ग्रोवर ने कहा, मैं नहीं जानता फिल्मी गानों को क्यों इतना अश्लील कहा जाता है? वुमनिया से कहीं ज्यादा अश्लील गाने तो शादियों पर गाए जाने वाले हमारे कई राज्यों के लोकगीत हैं। मैं अगर वो सुना दूं, तो आपके कान से धुंआ निकल जाए। यह केवल जनरेशन की समस्या है, साहित्य हो या कोई दूसरा क्षेत्र हर पीढ़ी आगे आने वाली पीढ़ी को कोसती है। दैट गर्ल इन यलो बूट से फिल्मों में गाने लिखने की शुरुआत करने वाले वरुण वरुण ने जल्द आने वाली फिल्म दम लगा के हइशा और मसान के लिए भी गाने लिखे हैं।
मैं हनी सिंह के श्रोताओं को विचार देना चाहता हूं
आज के दौर की बेस्ट सेलर किताब व्हाट लूजर के लेखक पंकज दुबे ने कहा, मैं हनी सिंह के श्रोताओं को अपनी राइटिंग से विचार देना चाहता हूं। उन्होंने कहा कि गंभीर और कठिन शब्दों का प्रयोग करके आप युवाओं को जोड़ नहीं सकते। आज के युवाओं से सीधे बातचीत के लहजे में जुड़ना होगा। गंभीरता का आभामंडल लेकर व्हाट्सएप्प जनरेशन से नहीं जुड़ा सकता। हिंदी और अंग्रेजी में ओरिजनल राइटिंग के साथ किताब लिखने वाले पंकज दुबे अब अपनी किताब पर फिल्म डायरेक्ट कर रहे हैं। स्ट्रीट फिल्म फेस्टिवल कराने के लिए उन्हें यूथ आइकॉन अवॉर्ड मिला है।
अपनी भाषा में काम हो तो सुधर जाएगी स्थिति
प्रसिद्ध कवि नरेश सक्सेना ने कहा कि आज कुछ भी लिखा जा रहा है, कुछ भी बोला और सुना जा रहा है। फिल्मी गाने हो या साहित्य आधी बातें तो समझ ही नहीं आती, यह इसलिए क्योंकि हम अपनी भाषा छोड़कर विदेशी भाषा में काम कर रहे हैं। अगर हमारे स्कूलों में अपनी भ