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आया नया एक्ट, नहीं छिपा सकेंगे टैक्स की जानकारी

7 वर्ष पहले
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भारतसरकार ने नई बजट नीति में ऑडिट रिपोर्ट संबंधी कानूनों में बड़े बदलाव किए हैं। अब कोई भी जानकारी सामान्य करदाता और सीए चाहकर भी नहीं छिपा सकेंगे। नई टैक्स ऑडिट रिपोर्ट ने टैक्स देने से बचने वालों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नई टैक्स ऑडिट रिपोर्ट वर्कशॉप में एक्सपर्ट्स ने इन्हीं मुद्दों पर जानकारी दी। सिविल लाइंस के वृंदावन हॉल में हुई इस वर्कशॉप का आयोजन इंकम टैक्स बार एसोसिएशन और ब्रांच ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ने मिलकर किया। इस दौरान यहां कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सीए आशुतोष श्रीवास्तव मौजूद रहे। उन्होंने टैक्स ऑडिट रिपोर्ट पर अप्रत्यक्ष कर का पूरा विश्लेषण किया। इसके अलावा सीए प्रफुल्ल पेंडसे ने टैक्स ऑडिट रिपोर्ट के प्रैक्टीकल प्वाइंट्स को बताया। कार्यक्रम में एसोसिएशन के पदाधिकारी भी मौजूद रहे।

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एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने बताया कि यू/एस 44 एबी ऑफ इंकम टैक्स एक्ट 1961 इस ऑडिट रिपोर्ट नियम का नाम है। इसके तहत कुछ बदलाव इस बार किए गए हैं। सीए को 30 सितंबर तक इसकी क्लाइंट्स की रिपोर्ट तैयार कर इंकम टैक्स डिपार्टमेंट को देनी है। इसमें किए गए बदलाव में ऐसी जानकारियां जो पहले नहीं मांगी जाती थीं वो भी अब डिपॉर्टमेंट को रिपोर्ट के जरिए देनी होगी। पहले इंडायरेक्ट टैक्सेस जैसे ही सर्विस टैक्स देने के वगैरह के बारे में जानकारी नहीं देनी होती थी, टीडीएस की सारी जानकारी डीटेल में देनी होगी, स्टाम्प वैल्यू से कम में प्रॉपटी लेन देन की जानकारी पहले छिपाई जाती थी। अब बनने वाली रिपोर्ट में जिस रेट में लेन देन हुआ और स्टाम्प वैल्यू की जानकारी भी दी जाएगी।

नई टैक्स ऑडिट रिपोर्ट वर्कशॉप में एक्सपर्ट्स ने नये मुद्दों पर जानकारी दी।