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डेंटल कॉलेज में रीडर और प्रोफेसर के 41 पदों के लिए एक भी डाक्टर नहीं आया

7 वर्ष पहले
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सरकारीडेंटल कॉलेज को मास्टर डिग्री की मान्यता मिलने की उम्मीदों को एक बार फिर झटका लगा है। कॉलेज में मास्टर डिग्री यानी एमडीएस की पढ़ाई चालू करने के लिए खाली पदों को भरने की कवायद की जा रही है। बुधवार को कॉलेज में वॉक इन इंटरव्यू आयोजित किया गया। इसमें में रेसीडेंट ट्यूटर के चार पद के लिए दांत के 60 डाक्टर पहुंच गए, लेकिन रीडर प्रोफेसर के 41 खाली पदों लिए एक भी पात्र डेंटिस्ट नहीं पहुंचा। इंटरव्यू 15 दिसंबर चलेंगे। इससे उम्मीद की जा रही है कि अभी रीडर प्रोफेसर के पदों के लिए सीनियर डाक्टर मिल जाएंगे।

डेंटल कॉलेज में प्रोफेसर के एक, रीडर के 12 असिस्टेंट प्रोफेसर के 24 पद खाली है। डाक्टरों की कमी के कारण ही पिछले तीन साल से डेंटल की मास्टर डिग्री शुरू नहीं की जा सकी है। डेंटल काउंसिल आफ इंडिया की टीम पिछले तीन साल से लगातार कॉलेज का निरीक्षण कर रही है। हर बार बाकी सुविधाओं के साथ-साथ डाक्टरों की कमी सामने जाती है। इसी वजह से काउंसिल कॉलेज को मास्टर डिग्री की पढ़ाई चालू करने की अनुमति नहीं दे रहा है। यहां डेंटल कॉलेज में 18 सीटों में मास्टर डिग्री चालू करने के लिए काउंसिल को प्रस्ताव भेजा गया है। डेंटल कॉलेज के संविदा डॉक्टरों को मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों से ज्यादा वेतन दिया जा रहा है।



इसके बाद भी प्रोफेसर, रीडर असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए पात्र डॉक्टर नहीं मिल रहे हैं। इसके विपरीत राज्य के निजी डेंटल कॉलेजों में मास्टर डिग्री की 63 सीटें हैं। वहां की फीस इतनी अधिक है कि गरीब मध्यम वर्ग के स्टूडेंट डेंटल की मास्टर डिग्री नहीं कर पा रहे हैं।

^रेसीडेंट के चार पदों के लिए अच्छी संख्या में डेंटिस्ट आए थे। वहीं प्रोफेसर, रीडर लेक्चरर के 41 पदों के लिए एक भी पात्र डेंटिस्ट नहीं पहुंचे। इंटरव्यू जारी रहेगा। उम्मीद है कि खाली पद जाएगा। डॉ.बिश्वजीत मिश्रा, प्राचार्यडेंटल कॉलेज

डेंटल मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों का वेतन

पदवेतन मेडिकल वेतन डेंटल

प्रोफेसर 90 हजार 1.20 लाख

रीडर 80 हजार 90 हजार

लेक्चरर 50 हजार 46 हजार