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राजधानी में स्वाइन फ्लू हुआ जानलेवा पर हेल्थ अमला जुटा लीपापोती में
स्वाइनफ्लू जान लेवा होता जा रहा है। सोमवार को अंबेडकर अस्पताल में स्वाइन फ्लू की संदिग्ध महिला की मौत हो गई। इसके पहले आरंग की ग्रामीण महिला की जान जा चुकी है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग का अमला लापरवाह बना हुआ है। जिला अस्पतालों में तो दवाएं भेजी गई है और ही स्वाइन फ्लू से बचाव का स्पेशल मास्क। अंबेडकर अस्पताल जिसे स्वाइन फ्लू का सेंट्रल ट्रीटमेंट सेंटर बनाया गया है वहां भी किसी तरह की अतिरिक्त सावधानी नहीं बरती जा रही है। उल्टे अफसर स्वाइन फ्लू को साधारण फ्लू बताने की कोशिश में जुटे हुए हैं। आरंग की महिला की मौत के बाद अफसरों ने यही किया। निजी अस्पताल के डाक्टरों ने महिला का सैंपल प्राइवेट लेबोरेटरी में भेजकर जांच करवायी थी।
रिपोर्ट में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई। उसके बाद अफसरों ने दिल्ली से रिपोर्ट मंगवाकर यह साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी उसकी मौत स्वाइन फ्लू से नहीं अन्य कारणों से हुई है। अफसरों की इसी लापरवाही के बीच स्वाइन फ्लू के पीड़ित लगातार बढ़ते जा रहे हैं। सोमवार को दिल्ली से ही दो मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई। इसके बावजूद अंबेडकर अस्पताल में स्वाइन फ्लू के लिए अलग से ओपीडी नहीं खोली गई। अस्पातल में डाक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के लिए थ्री लेयर एन-95 मास्क भी अब तक मंगवाया नहीं गया है, जबकि दो साल पहले जब स्वाइन फ्लू फैला था, तब यही मास्क बड़ी संख्या में सिर्फ मंगवाया गया था बल्कि डाक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के साथ-साथ एक-एक वर्कर के लिए पहनना अनिवार्य किया गया था।
टेबलेट के कई डोज के बाद सैंपल
स्वास्थ्यविभाग के अफसर टेमीफ्लू की दो-तीन डोज देने के बाद ही सैंपल ले रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि डोज देने के पहले ही जांच के लिए सैंपल लेना चाहिए। ऐसा होने से ही बीमारी की सही रिपोर्ट आती है। एक से ज्यादा डोज देने के बाद सैंपल लेने से रिपोर्ट में बीमारी की पुष्टि नहीं होगी क्योंकि डोज लेने से शरीर में उस बीमारी के वाइरस मौजूद नहीं रहते। विशेषज्ञों का कहना है कि इसी वजह से आरंग की महिला की दोबारा करवाई गई जांच रिपोर्ट में स्वाइन फ्लू की पुष्टि नहीं हुई। स्वाइन फ्लू की जांच के लिए जिस तरह से डोज देने के बाद सैंपल लिए जा रहे हैं, उसे लेकर भी कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। कहा जा रहा है कि ऐसा योजनाबद्ध तरीके से किया जा रहा है।
छिपाया जा रहा दवा का स्टॉक
स्वास्थ्यविभाग के अफसर दवा के स्टॉक को लेकर अजीबोगरीब तरीके से गोपनीयता बरत रहे हैं। वे यह तो कह रहे हैं कि स्वाइन फ्लू को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन यह बताने को तैयार नहीं कि आखिर उन्होंने टेमीफ्लू की कितनी डोज मंगवाई है। कहा जा रहा है कि अब भी दो दर्जन से ज्यादा मरीजों के इलाज के लायक दवा नहीं है।
जांचमें खर्च भी कर रहे
जांचमें स्वास्थ्य विभाग खर्च भी कर रहा है। एक डाक्टर ने बताया कि एक सेंपल की जांच में लगभग दस हजार रुपए का खर्च हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग दिनभर में कलेक्ट सैंपलों को रोज शाम को फ्लाइट से दिल्ली भेज रहा है। सैंपलों को भेजने और लैब में जांच का चार्ज मिलाकर इतना खर्च पड़ रहा है।
दोनए मरीज, संख्या बढ़कर 10 हुई
प्रदेशमें स्वाइन फ्लू के पीड़ितों की संख्या आठ से बढ़कर 10 हो गई है। सोमवार को दो मरीजों के सैंपल की रिपोर्ट भेजी गई। दोनों स्वाइन फ्लू से पीड़ित थे। दिल्ली की केंद्रीय लैब ने इसकी पुष्टि की। मरीजों का इलाज चल रहा है। स्वाइन फ्लू के बढ़ते संदिग्ध मरीजों से स्वास्थ्य अमले की व्यवस्था पर ही सवाल उठे हैं।
^ स्वाइन फ्लू को भारत सरकार ने ही साधारण फ्लू घोषित कर दिया है। यह बाकी बीमारियों की तरह एक निर्धारित समय में होगा और अपने आप समाप्त हो जाएगा। डा.आलोक शुक्ला, स्वास्थ्य सचिव
^दिल्लीकी रिपोर्ट में आरंग की महिला के बारे में स्पष्ट गया कि उसे स्वाइन फ्लू नहीं था। इससे साफ हो गया कि राज्य में अभी तक स्वाइन फ्लू से एक भी मौत नहीं हुई है। डा.आर प्रसन्ना, संचालक स्वास्थ्य सेवाएं
1. इलाज करनेवाले डाक्टर स्टाफ के पास नहीं हैं मास्क।
2. जांच किट तो दूर, अधिकांश जिलों में टैमी-फ्लू दवा नहीं।
3. सिर्फ 400 टैबलेट के सहारे बीमारी से लड़ने की तैयारी।
4. स्कूली बच्चों पर स्वास्थ्य विभाग में कोई सतर्कता नहीं।
5. रोज फ्लाइट से दिल्ली भेजे जा रहे हैं स्वाब के सैंपल।
1. स्वाइन फ्लू पीड़ितों के परिजनों तक को बांटे जा रहे मास्क।
2. सभी सीएमओ को जांच किट खरीदने के दिए गए निर्देश।
3. राजस्थान सरकार से ली गई हैं 15 हजार टैमी फ्लू टैबलेट।
4. सर्दी-खांसी वाले स्कूली बच्चों को तीन दिन की छुट्टी।
5. जबलपुर की रीजनल मेडिकल इंस्टीट्यूट में फ्लू की जांच।