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जमीन के गाइड लाइन रेट पर क्रेडाई ने दिए सुझाव

6 वर्ष पहले
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रायपुर| नएवित्तीय वर्ष में शहर के जमीन की सरकारी कीमत बढ़ाने के फैसले का विरोध शुरू हो गया है। जिला प्रशासन ने गाइड लाइन में इजाफा करने के लिए आम लोगों से सुझाव मांगे गए थे।

यह सुझाव इतने गुपचुप तरीके से मंगाए गए कि इसकी जानकारी ही लोगों को नहीं मिली। यही वजह है कि सुझाव देने के लिए अंतिम तिथि तक एक भी व्यक्ति का सुझाव रजिस्ट्री विभाग तक नहीं पहुंचा। नई कलेक्टर गाइड लाइन तय करने के लिए बिल्डरों के सबसे बड़े एसोसिएशन क्रेडाई की ओर से ही प्रस्ताव मिला। नई गाइड लाइन में इजाफा करने के लिए अफसर इस बार भी मनमानी कर रहे हैं। अफसरों का कहना है कि जमीन की कीमत तय करने के लिए पटवारियों से प्रस्ताव मंगाए जा रहे हैं। इन प्रस्तावों के आधार पर ही नई कलेक्टर गाइड लाइन जारी कर दी जाएगी। क्रेडाई के अध्यक्ष आनंद सिंघानिया ने बताया पुरानी गाइड लाइन में ही कई तरह की खामियां हैं।





बार-बार की शिकायत के बाद भी अफसरों ने इसे दूर नहीं किया। तीन साल से लगातार सुझाव देने के बाद भी एक भी सुझाव पर अमल नहीं किया जाता है। नई गाइड लाइन तय करने के लिए क्रेडाई ने अपने सुझाव जिला पंजीयक और कलेक्टर को सौंपे हैं। बिल्डरों मे अपने सुझाव में कहा कि सरकारी और बाजार की कीमत में बड़ा अंतर है, इसे दूर करना चाहिए। बहुमंजिला इमारतों का बाजार मूल्य तय करने के लिए हर फ्लोर पर जमीन का निर्धारण बार-बार किया जाता है। इसे केवल एक बार करना चाहिए। जिले के अफसर जो कीमत तय करते हैं वो बाजार मूल्य से 543 प्रतिशत ज्यादा है। इसका सीधा असर आम आदमी पर होता है। सिंघानिया ने अफसरों से दो टूक कहा कि रियल इस्टेट का कारोबार मंदी के दौर से गुजर रहा है इसलिए इस साल कलेक्टर गाइड लाइन में मनमाने ढंग से इजाफा नहीं होना चाहिए।