जेनरिक दवाएं नहीं बेचीं तो लाइसेंस रद्द
प्रदेशमें सरकारी ही नहीं अब निजी मेडिकल स्टोर में भी जेनरिक दवाएं रखना अनिवार्य होगा। राज्य सरकार ने निजी मेडिकल स्टोर में जेनरिक दवाएं रखने के निर्देश दिए हैं। उन्हें जेनरिक दवाओं की सूची भी प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। ऐसा नहीं करने वाले मेडिकल स्टोर के लाइसेंस रद्द किए जाएंगे।
स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल ने मंगलवार को मंत्रालय में विभागीय अधिकारियों की बैठक में इसके निर्देश दिए। उन्होंने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की। स्वास्थ्य मंत्री ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों से कहा कि वे अपने-अपने जिलों में मेडिकल दुकानों के संचालकों की बैठक लें और उन्हें इस बारे में राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों की जानकारी दें। निर्देश नहीं मानने वाले दुकान संचालकों के ड्रग और केमिस्ट लाइसेंस निरस्त कर दिए जाएं।
ब्रांडेड दवाओं की तुलना में जेनेरिक दवाएं सस्ती होती हैं लेकिन उनकी गुणवत्ता भी ब्रांडेड दवाओं जैसी रहती हैं। इसलिए मरीजों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवा मिले यह राज्य सरकार की स्पष्ट नीति है। उन्होंने आगामी महीनों में आदिवासी बहुल क्षेत्रों में मलेरिया, उल्टी-दस्त, पीलिया, डेंगू और मीजल्स आदि संक्रामक बीमारियों से निपटने के लिए अग्रिम रणनीति तैयार रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बारिश के इस मौसम में गांवों और शहरों में इस प्रकार की अन्य कई मौसमी बीमारियों की आशंका रहती है।
यह दिए निर्देश
राजधानीरायपुर स्थित अम्बेडकर अस्पताल सहित सभी जिला अस्पतालों तथा विकासखंडों के सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा उप स्वास्थ्य केन्द्रों में दवाईयों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। सभी स्तरों के सरकारी अस्पताल चौबीसों घण्टें खुला रखें और विभागीय अधिकारी तथा कर्मचारी अनिवार्य रूप से अपने मुख्यालयों में रहे। अग्रवाल ने कहा कि स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और मितानिनों को शहरों और गांवों में गरीब परिवारों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए निर्देशित किया जाए। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला सहित अधिकारी मौजूद थे।
फरमान