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नक्सली गढ़ में पुलिस मचाएगी खलबली, 5 और बटालियन झोंकेंगे
रवीन्द्र मिश्र| नई दिल्ली/ रायपुर
देशमें नक्सलियों के खिलाफ बड़े अभियान की शुरुआत दक्षिण बस्तर से होने जा रही है। संकेत हैं कि गर्मी में बस्तर के जंगल में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों की आक्रामक कार्रवाई होगी। इसके लिए मार्च के अंत तक सशस्त्र बलों की पांच बटालियन बस्तर पहुंच जाएगी। बारिश के पहले नक्सलियों की कथित राजधानी को सरकार भेदने की फिराक में है।
दिसंबर में कासलपाड़ में 14 जवानों की शहादत के बाद केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने रायपुर आकर ऐलान किया था कि नक्सल मोर्चे पर अब निर्णायक लड़ाई छेड़ने का वक्त गया है। उसी दौरान बस्तर में सशस्त्र बलों की 10 और बटालियन भेजने का फैसला हुआ था। अब तक एक-एक कर पांच बटालियन बस्तर पहुंच चुकी है। पांच और बटालियन के आने के बाद दक्षिण बस्तर के सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर जैसे दूरस्थ जिलों में केवल पुलिस की कार्रवाई तेज होगी बल्कि विकास कार्य भी प्रारंभ किए जाएंगे। सुरक्षा बलों की मौजूदगी में विकास काम कराए जाएंगे। विकास और कानून के मोर्चे पर काम करने के लिए पुलिस को अपने इंटेलीजेंस को मजबूत करने की अनिवार्यता होगी। पर इसके लिए सबसे बड़ी समस्या है कनेक्टिविटी की। इस कारण केंद्र सरकार ने काफी समय से लंबित मोबाइल टावर के काम को तत्काल प्रभाव से हाथ में लेने की योजना बनाई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार छत्तीसगढ़ सहित देश के 10 नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नए लगने वाले 1836 मोबाइल टावर लगाए जाने हैं। छत्तीसगढ़ आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के 521 टावरों के लिए टेंडर की प्रक्रिया अंतिम चरण में हैं साल भर में केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ में 146, आंध्र प्रदेश में 40, तेलंगाना और बिहार में 184, झारखंड में 782, महाराष्ट्र में 57, मध्यप्रदेश में 16, ओडिशा में 253, उत्तर प्रदेश में 78 और पश्चिम बंगाल में 96 मोबाइल टावर लगाने का लक्ष्य तय किया है।
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थापित 351 मोबाइल टावरों की स्थिति भी काफी बदतर है और इसमें से लगभग 276 टावरों को सोलर बैटरी के अभाव में नहीं चालू किया जा सका है तो 6 टावरों का प्रसारण रुका है। वहीं एक टावर के जला दिए जाने से खराब है तो 15 को फिर से स्थापित करना है।