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प्रदेश में उगा रहे विदेशी फल एप्पल बेर और ड्रैगन फ्रूट भी
धानकी बंपर पैदावार के लिए प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ में अब विदेशी फलों की खेती हो रही है। यहां के किसान ऐसे फसलों की ओर रुचि ले रहे हैं, जिनसे ज्यादा उत्पादन और फायदा मिल सके। प्रदेश के किसानों ने ताइवान के एप्पल बेर और थाईलैंड के मशहूर ड्रैगन फ्रूट की फसल लेनी शुरू की है। इन दोनों फलों की डिमांड मेट्रोसिटी में रहती है।
रायपुर, दुर्ग और बेमेतरा जिले के किसानों ने इसकी शुरूआत की है। राजधानी के धरसीवां से लगे नवागांव (बेरला) में किसान हिम्मत पटेल ने 30 एकड़ में एप्पल बेर की खेती शुरू की है। पिछले साल अप्रैल में उन्होंने आठ हजार पौधे लगाए थे, जो आठ से नौ महीने में फलने लगे। इससे हर पेड़ में 12 से 20 किलो बेर का उत्पादन हुआ। एक फल का वजन 100 से 150 ग्राम तक है। इसमें पेड़ छह से आठ फीट तक होते हैं। इसकी शाखाओं में बेर लद जाते हैं, इसके लिए इसे बांस के खंभों से सहारा देना पड़ता है। इससे प्रति एकड़ दो लाख रुपए तक का उत्पादन होता है। इसी तरह धमधा के आनंद सिंह, टेमरी (दुर्ग) में कुलेश्वर साहू, गरियाबंद में नीलेश साहू, देवेंद्र कोठारी इसकी खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसके पौधे पश्चिम बंगाल से लाए जाते हैं। एक पौधा लगभग 150 रुपए में मिलता है। एक साल में ही यह उत्पादन देने लगता है। यह प्रदेश के वातावरण के अनुकूल है। फलों का कलर एप्पल जैसा ही होता है।
^प्रदेश में फलों की खेती के लिए किसान रुचि ले रहे हैं। इसके लिए सब्सिडी योजना बनाई जा रही है। एप्पल बेर और ड्रैगन फ्रूट अभी ट्रायल स्टेज में हैं। इनके नतीजों के आधार पर इसमें अनुदान देने की योजना तैयार की जाएगी। भुवनेशयादव, संचालक उद्यानिकी
रायपुर और दुर्ग में ड्रैगन फ्रूट की खेती
छत्तीसगढ़में ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए रायपुर और दुर्ग जिले के कुछ किसानों ने शुरूआत की है। पाटन के चंगोरी में मितुल कोठारी, ठेलका के आनंद सिंह ने इसके पौधे लगाए हैं। अभी भारत में थाईलैंड से ड्रैगन फ्रूट रहे हैं। इसकी खेती सीखने के लिए उनका दल पश्चिम बंगाल का दौरा भी कर चुका है। कोठारी ने बताया कि यह फल तोड़ने के बाद 25 दिन तक खराब नहीं होता। ज्यादा दिन तक सुरक्षित रहने के कारण इसे एक्सपोर्ट किया जा सकता है। इस पर चार लाख रुपए प्रति एकड़ खर्च आता है। यह लागत एक बार ही लगती है। डेढ़ साल बाद 10-12 किलो पहला उत्पादन आता है।
प्रति एकड़ में 36 सौ पौधे लगते हैं। बाजार में इसकी कीमत 200 रुपए किलो है। ड्रैगन फ्रूट की फसल थाईलैंड, सेंट्रल अमेरिका, मैक्सिको, इंडोनेशिया और चीन में ली जाती है। यह कैक्टस प्रजाति का पौधा होता है, जिसके फूल एक महीने में फल में बदल जाते हैं। बड़े-बड़े शापिंग कांप्लेक्स और मॉल में यह बिकता है।
दूसरे फलों की भी खेती
छत्तीसगढ़में फलों की खेती को लेकर किसानों का रुझान बढ़ा है। उद्यानिकी विभाग ने सूरजपुर जिले में स्ट्राबेरी, लीची और पियर की खेती शुरु करवाई है। दुर्ग जिले के अछोटी में किसान हितेश वरु ने 20 एकड़ में सीताफल के पौधे लगाए हैं। वहीं डॉ. नारायण चावड़ा ने अमरूद (बिही) की नई किस्म निकाली है, जिसे बड़े पैमाने पर किसान लगा रहे हैं। ताइवान के पपीते की खेती भी बड़े क्षेत्र में हो रही है। इसके अलावा केले का उत्पादन भी बड़े पैमाने पर प्रदेश में हो रहा है।