रायपुर. राजधानी सेकरीब 40 किलोमीटर दूर आरंग के आधा दर्जन से ज्यादा गांवों के स्कूलों में मध्यान भोजन के लिए सड़ा उपयोग किया जा रहा था। गांव की महिलाओं को जब इसकी खबर लगी तो वे मंगलवार को स्कूलों से चावल की बोरियां उठाकर कलेक्टोरेट पहुंच गई। महिलाओं ने चावल की बोरियां खाद्य नियंत्रक के दफ्तर में रखकर वहीं बैठ गई। अफसरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं मानी। वे तत्काल चावल बांटने वाली नवागांव सोसायटी की जांच करने की मांग करने लगी।
महिलाओं के लगातार हंगामे के बाद बाजू दफ्तर में बैठे एडीएम संजय अग्रवाल भी बाहर गए। उन्होंने खाद्य अफसरों को उसी समय मौके पर जाकर जांच करने के निर्देश दिए। एडीएम के निर्देश के बाद जिला खाद्य नियंत्रक दयामणि मिंज नवागांव सोसायटी पहुंच गई। उन्होंने सोसायटी को सील कर 1100 क्विंटल से ज्यादा चावल जब्त कर लिया। इस चावल की अब बुधवार को जांच की जाएगी।
मंदिर हसौद क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य परमानंद जांगड़े के नेतृत्व में पहुंची महिलाओं ने बताया कि चावल की क्वालिटी इतनी खराब है कि उसमें एक तरह का नहीं बल्कि कई किस्म के चावल मिला दिए गए हैं। चावल में सड़े हुए चने और कनकी भी बड़ी मात्रा में है। इसे स्कूलों में मध्याहन भोजन में परोसा जा रहा था। इससे स्कूलों के बच्चे बीमार पड़ रहे थे। इसकी शिकायत कई बार नवागांव सोसायटी वालों से की गई, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। इस वजह से महिलाएं स्कूलों से चावल की बोरियां लेकर कलेक्टोरेट पहुंच गई।