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स्वाइन फ्लू से फिर एक मौत...सावधान! बारिश-ठंड से फैल रहा वायरस
भास्कर न्यूज नेटवर्क| रायपुर/नई दिल्ली
स्वाइनफ्लू ने एक और जान ले ली। गुरुवार को दुर्ग के बोरसी में वृंदानगर निवासी 27 साल के शिक्षक देवेंद्र साहू की मौत हो गई। वहीं उसके पास ट्यूशन पढ़ने वाली संदिग्ध छात्रा को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 9 संदिग्ध मरीजों के सैंपल जांच के लिए दिल्ली भेजे गए। जनवरी से अब तक 78 सैंपल भेजे जा चुके हैं, जिसमें 15 पाजीटिव मिले हैं। बारिश और ठंड के चलते प्रदेश में स्वाइन फ्लू का खतरा और बढ़ गया है। शेष|पेज11
ठंडऔर नमी के मौसम स्वाइन फ्लू के वायरस एन1एच1 सक्रिय हो जाते हैं और गुरुवार को हुई बारिश के कारण खतरा दो-तीन गुना बढ़ गया है। ऐसे में सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।
भारत में स्वाइन फ्लू
इस साल 1 जनवरी से 10 फरवरी के बीच लगभग 5157 लोग स्वाइन फ्लू की चपेट में चुके हैं। लगभग 407 की मौत हो चुकी है। दिल्ली, गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, तमिननाडू और तेलंगाना सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं।
इस साल अब तक प्रदेश में 15 मरीज
छत्तीसगढ़ में इस साल स्वाइन का पहला मामला रायपुर में 30 जनवरी को सामने आया। रिटायर्ड कर्नल अब भी एमएमआई में भर्ती हैं। अभी तक 15 मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। दो संदिग्ध महिलाओं की मौत हो चुकी है। प्रदेश में सबसे ज्यादा मौत 2009-10 में हुई थी। तब 35 लोग मारे गए थे। 150 से ज्यादा मरीज मिले थे।
- महामारी नियंत्रण के प्रदेश नोडल अधिकारी डा. एस. एम. एम. मूर्ति
घरेलू नुस्खे
हल्के स्वाइन-फ्लू के लिए ज्यादा परेशान होने की जरुरत नहीं है। सावधानी बरतने पर ये संक्रमण अपने आप खत्म हो जाता है। दाल-चीनी और केसर वाली चाय पी सकते हैं। स्वाइन फ्लू के लक्षण वाले मरीजों को दूध में हल्दी मिलाकर पीना लाभदायक हो सकता है। इसके अलावा सामान्य वायरल बुखार होने पर भी मल्टीविटामिन दवाएं ली जा सकती है। स्वाइन फ्लू से बचने के लिए अदरक वाली चाय भी पीने की सलाह दी जाती है।
2009 में मैक्सिको में गई थी कई जानें
ये एक प्रकार का इंफ्लूएंजा है जो सुअरों से इंसानों में पहुंची है। 2009 में मैक्सिको में स्वाइन फ्लू की वजह से सैकड़ो लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद विश्व स्वास्थ्य सगंठन ने स्वाइन फ्लू को महामारी घोषित किया था। अब स्वाइन फ्लू इंसानों से फैलने वाले वायरस का रूप ले चुका है। सर्दियों में स्वाइन फ्लू का संक्रमण सबसे ज्यादा होता है। गर्मी के आते-आते इसका असर कम पड़ने लगता है।
मौसम बदलेगा तो संक्रमण कम होगा
^संक्रमणका मुख्य कारण कड़ाके की ठंड है। मौसम बदलेगा, तो संक्रमण कम होने लगेगा। इसलिए डरने की बजाए सतर्कता की जरूरत है।\\\'\\\' डॉ.आरके सिंघल बीएलके अस्पताल में मेडिसीन विभाग प्रमुख, नई दिल्ली
आफिस फील्ड
हाथमें कपड़ा रखें। भीड़ वाली जगहों से बचंे। ट्रेन में ज्यादा सावधान रहें।
सफर करते समय मास्क का उपयोग हो तो बेहतर। अन्यथा रुमाल साथ रखें।
स्कूली बच्चे
खांसीहोने पर क्लास में दूरी बनाए रखें। जानकारी टीचर को दें।
हर खाने से पहले हाथों को अच्छे से धोएं।
गर्भवती महिलाएं
भीड़भाड़वाली जगह जैसे सिनेमाहाल, मार्केट या बाजार जाने से जरूर बचें।
परिवार में किसी को खांसी हो रही हो, तो उनसे दूरी बनाए रखें।
भोजन कैसा: सभी तरह का ताजा भोजन।-एक्सपर्ट : डॉ एम वली, लोहिया अस्पताल, नई दिल्ली
बुजुर्ग बीमार
जांचकराएं। डायबीटीज इम्यूनिटी कम है, तो वे ज्यादा सावधानी रखें।
बरतने की जरूरत है। ऐसे मरीजों में किसी भी वायरल जैसे लक्षण होने पर तुरंत डाक्टर से मिलना चाहिए।
क्या करें |ये जानकारी आपके काम की हो सकती है
ये करें
डाक्टरोंकी सलाह के बिना कोई भी दवाएं खाएं।
भ्रमपालें सरकारीनिजी अस्पतालों में इलाज संभव। भ्रम में रहें।
हेल्पलाइन
0771-2890113, 2890081 मेंसहायता लें।
भारत में एक जैसा फ्लू
छत्तीसगढ़में वही स्वाइन फ्लू है जो भारत के दूसरे हिस्सों में है। स्वरूप नहीं बदला। पूरा इलाज है।
अंशुप्रकाश, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सं. सचिव, नई दिल्ली
लक्षण पता चलने पर फर्स्ट ट्रीटमेंट
सामान्यबुखार में पेरासिटामोल लिया जा सकता है। बहती नाक के लिए भी एंटी-बायोटिक्स ली जा सकती है। लेकिन इनके बावजूद सांस लेने में तकलीफ हो रही हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
{खांसी, बुखार, गले में दर्द, नाक बहना, सिर-दर्द, ठंड लगना और थकान होना बीमारी के लक्षण हो सकते हैं।
{डायबिटीज के मरीज और धूम्रपान करने वालों पर सांस की दिक्कत गंभीर हो सकती है।