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बिहार में मांझी...

6 वर्ष पहले
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बिहार में मांझी...

स्पीकरभी नीतीश पर मुहर लगा चुके हैं।

अब नीतीश खुद सोमवार दोपहर 1.30 बजे राज्यपाल से मिलेंगे। उधर, मुख्यमंत्री जीतनराम शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से घर जाकर मिले। फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और साफ किया कि वह इस्तीफा नहीं देंगे। बल्कि 20 फरवरी को विश्वासमत साबित करेंगे। जिससे जरूरत होगी, उससे समर्थन लेंगे, लेकिन यूं हार नहीं मानेंगे।

नीतीश को खरी-खोटी भी सुनाई। बोले, ‘नीतीश अच्छे आदमी हैं, पर मेरी लोकप्रियता बढ़ी तो घबरा गए। वह सत्ता के बिना नहीं रह सकते।’ अब सब राज्यपाल पर है कि वे बहुमत साबित करने के लिए किसे बुलाते हैं। इस बीच, पूर्व मंत्री बीमा भारती ने मंत्री विनय बिहारी और विधायक सुमित सिंह पर मांझी को समर्थन देने के लिए धमकी देने का आरोप लगाया। दोनों के खिलाफ एफआईआर कराई।

दक्षिणबस्तर से...

केंद्रीयसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद से बात कर इसमें रही अड़चनों को दूर किया जाएगा। 1 दिसंबर को कासलपाड़ में 14 जवानों की शहादत के बाद जब केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह रायपुर आए थे। तब इस नए प्लान की भूमिका तैयार हुई थी। उसके बाद केंद्र ने पहली बार तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को बुलाया है। इसमें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के अलावा तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव और उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को विशेष तौर पर बुलाया गया है।

जड़ोंसे उखड़...

जज्बे के आगे सुनामी बौनी: दिनेश15 साल के थे, जब श्रीलंका में 26 दिसंबर 2004 को सुनामी ने कहर बरपाया था। इत्तेफाक से टीवी पर श्रीलंका-न्यूजीलैंड का मैच देख रहे थे। मां ने पुकारा तो दो मिनट में घर छोड़कर भागे। घर-गांव और रिश्तेदार सब बह गए। लेकिन सुनामी क्रिकेट का जुनून नहीं बहा सकी। शरणार्थी कैंप में ही खेल को धार देते रहे। आज श्रीलंका के विकेटकीपर-बल्लेबाज हैं।

भूकंपसे दहले क्राइस्टचर्च से वर्ल्ड कप का आगाज: क्राइस्टचर्चशहर 22 फरवरी 2011 को भूकंप से दहल गया था। 6.3 तीव्रता के भूकंप ने 185 जिंदगियां ले लीं। हजारों घायल हुए। आधे से ज्यादा शहर तबाह हो गया था। आज यह सज संवरकर तैयार है वर्ल्ड कप के पहले मैच की मेजबानी के लिए। श्रीलंका और न्यूजीलैंड के बीच यहां उद्घाटन मैच खेला जाएगा। इसमें भी खास बात यह होगी कि न्यूजीलैंड की टीम से खेल रहे कोरी एंडरसन और टॉम लाथम क्राइस्टचर्च के ही हैं।

बीवीको गिफ्ट..

हरीशरियल एस्टेट, शेयर मार्केट का कारोबार करते हैं। कामिनी उनका बैक ऑफिस संभालती हैं। हरीश ने बताया, ‘18 जनवरी को मेरा बर्थडे था। उस दिन कामिनी ने पोर्श कार की चाबी मेेरे हाथ पर रख दी। इसका मॉडल मुझे बेहद पसंद आया। कामिनी ने कहा- घर में मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू और फॉर्च्यूनर पहले ही हैं। इसलिए इस बार पोर्श गिफ्ट की।’ हरीश ने बताया, ‘कामिनी ने जिस शिद्दत से तोहफा दिया, उसे देख मैंने भी वेलेंटाइन डे पर उन्हें रिटर्न गिफ्ट के रूप में स्पेशल नंबर देने की ठान लिया था।’

पैरोंसे लिखी...

पढ़नातो सीख लेगा, पर लिखना कैसे? क्या परीक्षा में उसे हर बार राइटर लेना पड़ेगा? लेकिन ऐसा कुछ नहीं करना पड़ा। खुद चंपेश्वर ने अपने पैरों की उंगलियों को हाथों की उंगलियों में तब्दील कर दिया। हायर सेकेंडरी तक की पढ़ाई राजिम के सरकारी हिंदी मीडियम स्कूल में हुई। गणित और विज्ञान विषयों में रूचि थी। इंजीनियरिंग करना चाहता था। 2011-12 में पीईटी परीक्षा दी। सलेक्शन हो गया।

आईएएसबनने का सपना :चंपेश्वर की आंखों में अब आईएएस बनने का सपना है। अगले साल वे इंजीनियर बन जाएंगे। उन्होंने अभी से अखबार पढ़ना शुरु कर दिया है। जनरल नालेज की किताबें पढ़कर नोट्स तैयार कर रहे हैं। पीएससी के साथ ही यूपीएससी की परीक्षा देने का मन उन्होंने बना लिया है। कहते हैं कि अपने धमतरी जिले का डीएम बनकर राजिम के अपने गांव में बच्चों के लिए स्कूल खोलूंगा।

डा.अनूप भल्ला ने निखारा चंपेश्वर : चंपेश्वरकी प्रतिभा को पहचानने वाले जोहरी वन विभाग के एडिशनल पीसीसीएफ डा. अनूप भल्ला हैं। उन्होंने 9 वीं कक्षा के बाद से ही चंपेश्वर की पढ़ाई का खर्च उठा लिया। लगातार मोटिवेट किया। अब इंजीनियरिंग की पढ़ाई का खर्च भी वे ही उठा रहे हैं। राजिम के कौनकैरा गांव में दौरे के दौरान वे चंपेश्वर से मिले थे। शंकराचार्य में एडमिशन के बाद कालेज के चेयरमैन निशांत त्रिपाठी भी उनकी मदद कर रहे हैं। डा. भल्ला कहते हैं कि वे बरसों से गरीब बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी उठाते रहे हैं। वे ऐसे बच्चों को ढूंढते हैं, जिनमें उन्हें कुछ बनने की ललक नजर आती है। चंपेश्वर की तरह ही थानेश्वर वर्मा जो उनके चपरासी का लड़का है। उसकी पढ़ाई का खर्च भी उन्होंने उठाया। आज वह रुंगटा कालेज से सीविल ब्रांच में बीई कर चुका है। शंकराचार्य कालेज में पढ़ा रहा है। अगले साल वह भी यूपीएससी की परीक्षा में बैठेगा।

टाइममिला तो मार ली बाजी: चंपेश्वरजमीन पर बैठकर लिखता है। चौथे सेमेस्टर के पेपर के दौरान वह खाली कमरे में बैठकर लिख रहा था। तीन घंटे में पेपर खत्म हुआ। इनविजिलेटर भूल गए कि दूसरे कमरे में चंपेश्वर पेपर लिख रहा है। 15 मिनट बाद उन्हें ध्यान आया। चंपेश्वर को भी वक्त का पता नहीं चला। उसने 9 प्रश्न हल कर दिए। उस पेपर में उसे 79 प्रतिशत अंक हासिल हुए।

हिंदीमीडियम था, तो अंग्रेजी सीखी : चंपेश्वरने हायर सेकेंडरी राजिम के हिंदी मीडियम स्कूल से की। जब इंजीनियरिंग की आईटी ब्रांच में एडमिशन हुआ, तो पूरी पढ़ाई इंग्लिश में करनी थी। पैर से हिंदी लिखने की आदत तो थी, मगर अंग्रेजी में दक्ष नहीं थे। इस कारण पहले दो महीने हर दिन चार से छह घंटे तक अंग्रेजी लिखने का अभ्यास किया। तब जाकर उनकी अंग्रेजी अच्छी हुई और लिखने की स्पीड भी बढ़ी।