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15 नहीं, कहीं आठ तो कहीं 11 क्विंटल धान की खरीदी

7 वर्ष पहले
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धानखरीदी में नया पेंच गया है, सरकार ने किसानों से प्रति एकड़ में पहले 10 क्विंटल फिर 15 क्विंटल धान खरीदने की घोषणा की है, लेकिन सोसाइटियों में इतनी मात्रा में धान खरीदा ही नहीं जा रहा। बल्कि अब हर सोसाइटी में धान खरीदी के लिए अलग-अलग मात्रा तय कर दी गई है। इसके कारण किसी सोसाइटी में आठ क्विंटल धान खरीदी की जा रही है तो कहीं पर 11 क्विंटल प्रति एकड़। ऐसे बहुत कम सोसाइटियां हैं, जहां 15 क्विंटल की दर से धान खरीदी हो रही है। गांवों में सोसाइटियों के अधिकारी भी इस बात से अनजान है कि धान खरीदी उत्पाद के हिसाब से की जानी है। वे इसे साफ्टवेयर की गड़बड़ी बता रहे हैं, लेकिन खाद्य विभाग के संचालक डॉ. कमलप्रीत सिंह का कहना है कि किसानों से अधिकतम धान खरीदने की सीमा 15 क्विंटल तय की गई है, लेकिन यह उस क्षेत्र की उत्पादकता पर निर्भर करेगा। यदि वहां औसत उत्पादन 15 क्विंटल से कम है तो वहां कम खरीदी की जाएगी।

खाद्य विभाग से सभी सोसाइटियों को जारी निर्देश में किसानों के धान खरीदी की सीमा 15 क्विंटल करने की बात लिखी गई है। लेकिन धान खरीदी के साफ्टवेयर में हर सोसाइटी में अधिकतम खरीदी की सीमा तय कर दी गई है, जिसके कारण उस सीमा से ज्यादा धान खरीदी नहीं हो पा रही है। दुर्ग जिले के नंदकट्ठी सोसाइटी में इसे विरोध में किसानों ने मंगलवार को खरीदी बंद करा दी। किसान नेता रविप्रकाश ताम्रकार ने बताया कि यहां किसानों से 10.8 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से खरीदी की जा रही है, जबकि मुख्यमंत्री ने 15 क्विंटल खरीदने की घोषणा की है।