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नया पाठ्यक्रम बना दिया पर अब तक नहीं लिखी किताबें
तीनसाल की लेटलतीफी के बाद शासकीय स्कूलों में नया पाठ्यक्रम लागू करने की तैयारी है। इसकी घोषणा तो कर दी गई है, लेकिन नई किताबें नए सत्र में बच्चों के बीच पहुंचेंगी या नहीं, इसे लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। दरअसल एससीईआरटी ने अब तक किताबों के लेखन का काम शुरू नहीं किया है।
माध्यमिक शिक्षा मंडल की ओर से नवीं-ग्यारहवीं के सिलेबस को अपग्रेड कर दिया गया है। इस बदलाव की घोषणा जनवरी में की गई। फरवरी में किताब के लेखन की जिम्मेदारी एससीईआरटी को दी गई। करीब सात महीने बाद भी इसके लेखन का काम शुरू नहीं हुआ। वहीं किताब लेखन के संबंध में माशिमं एससीईआरटी के बीच खींचतान की खबर भी सामने आई। जानकारों का कहना है कि किताबों के लिखने के बाद वह कई प्रक्रिया से गुजरती है। इसके बाद किताब तैयार होती है। लेखन का काम अब तक शुरू नहीं होने से इसकी संभावना कम है कि अगले सत्र में सभी किताबें 16 जून से पहले स्कूलों को मिल जाएंगी। गौरतलब है कि पहली से आठवीं तक की किताबें लिखने की जिम्मेदारी पहले एससीईआरटी के पास थी। जबकि नवीं से बारहवीं की किताबों को माशिमं से लिखा जाना था। लेकिन इस नियम में बदलाव कर सभी किताबें लिखने की जिम्मेदारी एससीईआरटी को दी गई है। एससीईआरटी के आला अधिकारियों का कहना है कि किताबें लिखने की तैयारी शुरू कर दी गई है। 22 से 27 सितंबर तक वर्कशॉप चल रही है। यहां किताब लेखन की जानकारी दी जा रही है।
इसके बाद लेखन का काम शुरू होगा।
तीन साल की देरी पहले ही
स्कूलके सिलेबस को पांच साल में अपग्रेड करना होता है। 2007-08 में आखिरी बार 9वीं-11वीं का सिलेबस अपग्रेड किया गया था। इसके तहत 2012-13 में फिर अपग्रेड किया जाना था। लेकिन माशिमं की लेटलतीफी से पहले ही सिलेबस तीन साल पिछड़ गया है। इसे 2015-16 में लागू करना है। लेकिन लेखन कार्य अब तक शुरू नहीं होने से फिर से लेटलतीफी की आशंका बढ़ गई है।