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िबजली महंगी होने का अंदेशा

7 वर्ष पहले
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रायपुर|कोल ब्लाकआवंटन रद्द करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद छत्तीसगढ़ में बिजली महंगी होने की संभावना बढ़ गई है। साथ ही आने वाले दिनों में राज्य को भी बिजली संकट से जूझना पड़ सकता है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत प्रदेश के 36 के 36 कोल ब्लॉकों का आवंटन निरस्त हो गया है। इनमें सात कोल ब्लॉक में खुदाई शुरू हो चुकी है। जानकारों की मानें तो संकट का अंदेशा इसलिए है क्योंकि कोल आवंटन के रद्द होने से जहां सारे नए प्रोजेक्ट थम गए हैं वहीं चल रहे प्रोजेक्टों पर भी भारी पेनाल्टी लगाई गई है जो हजारों करोड़ है। ऐसे में बिजली उत्पादन की लागत बढ़ जाएगी।



जिसका असर उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।

पॉवर हब का सपना भी टूटा

छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश में 100 से ज्यादा बिजली संयंत्र लगाने के लिए एमओयू किए हैं। इनसे 60 हजार मेगावाट बिजली पैदा करने का सपना देखा गया था। इसके लिए 66 कंपनियों को कोल ब्लाक भी आवंटित किए गए हैं। खदानों से कोयला निकालकर बिजली पैदा करने की तैयारी भी कर ली गई थी। अकेले कोरबा से 10 हजार मेगावाट बिजली पैदा करने की तैयारी है, लेकिन कोल ब्लाक आबंटन के रद्द होने से पूरा मामला उलझ गया है। इसके अलावा कई अन्य कंपनियों के पावर प्लांट भी तैयार हो चुके हैं। वे खदानों को डेवलप करने में लगे हैं। पर इस फैसले से सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया।

36 में से इन सात कंपनियों ने शुरू कर दिया था खनन

छत्तीसगढ़ में कुल 36 कोल ब्लाक हैं। इन्हें 66 कंपनियों को आबंटित किया गया है। लेकिन केवल सात कंपनियां अपना खदान शुरू कर कोयला निकाल रही हैं। इनमें जिंदल पावर, मोनेट, शारडा एनर्जी, प्रकाश इंडस्ट्रीज और जायसवाल निको शामिल हैं। छग के कोल ब्लाक का आवंटन इस दौरान देश के छह राज्यों को भी किया गया था। इनमें छग, महाराष्ट्र, मप्र, गुजरात, राजस्थान और तमिलनाडु शामिल है।