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ग्रेजुएशन में सेमेस्टर नए सत्र में लागू करने की तैयारी

6 वर्ष पहले
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नएसत्र में ग्रेजुएशन की पढ़ाई में सेमेस्टर सिस्टम लागू करने के प्रयास तेज हो गए हैं। पं.रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे लेकर तैयारी शुरू कर दी है। जल्द ही इस संबंध में कॉलेजों को पत्र भेजा जाएगा।

राजभवन में राज्यपाल की अध्यक्षता में होने वाली आगामी समन्वय समिति की बैठक में भी सेमेस्टर सिस्टम पर चर्चा होने के आसार हैं। पिछले साल जनवरी में हुई समन्वय समिति की बैठक में ही ग्रेजुएशन में भी सेमेस्टर सिस्टम लागू करने के प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई थी। उसके बाद भी उच्च शिक्षा से संबद्ध प्रदेश के एक भी कॉलेज में ग्रेजुएशन में इस सिस्टम को लागू नहीं किया जा सका।

उस समय यह कारण बताया गया था कि उसका सिलेबस ही तैयार नहीं है। इस वजह से कॉलेजों ने सिस्टम लागू करने से इंकार कर दिया है। अभी नया सत्र को शुरू होने में चार महीने का समय है। यही वजह है कि इस सत्र में उसी सिस्टम को लागू करने की कवायद फिर से शुरू कर दी गई है। विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि कॉलेजों को पहले से ही सेमेस्टर प्रणाली के संबद्ध में तैयारी करने को कहा गया था। आने वाले सत्र से इसे किस तरह से लागू किया जाए, इस बारे में कॉलेज के प्राचार्यों के साथ चर्चा की जाएगी।

पूरा कोर्स दो भाग में

विश्वविद्यालयमें अभी ग्रेजुएशन की पढ़ाई वार्षिक पाठ्यक्रम के अनुसार होती है। इसके तहत साल में एक बार मुख्य परीक्षा होती है। सेमेस्टर में यही कोर्स दो भाग में यानी छह-छह महीने के अंतराल में बांटा जाएगा।

ऑटोनोमस कॉलेज में संभावना ज्यादा

रविविसे संबद्ध सभी कॉलेजों में ग्रेजुएशन में सेमेस्टर लागू करने की योजना है लेकिन ज्यादातर निजी कॉलेज तुरंत ऐसा करने की स्थिति में नहीं हैं। ऑटोनोमस कॉलेज से ही सेमेस्टर प्रणाली की शुरुआत हो सकती है। अभी प्रदेश में डिग्री गर्ल्स, साइंस, छत्तीसगढ़, दिग्विजय कॉलेज राजनांदगांव, साइंस कॉलेज दुर्ग जैसे ऑटोनोमस कॉलेज में ही बेहतर सुविधाएं हैं। इन्हीं कॉलेजों में सबसे पहले सेमेस्टर सिस्टम शुरू करने के लिए अफसर भी तैयारी कर रहे हैं।