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गर्भवती महिलाओं को 6 माह से नहीं मिली आयरन टेबलेट

6 वर्ष पहले
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अंबेडकरअस्पताल जिला अस्पताल में गर्भवती महिलाआें को छह माह से आयरन की टेबलेट नहीं दी जा रही है। दोनों अस्पतालों में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय सीएमओ से टेबलेट दी जाती है।

सीएमओ कार्यालय के पास ही टेबलेट नहीं है। राज्य के प्रमुख अस्पतालों में राष्ट्रीय कार्यक्रम में शामिल स्कीम का पालन नहीं होने से पूरे प्रदेश में टेबलेट की उपलब्ध को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। अब अफसर एक दूसरे पर जिम्मेदारी थोपकर पल्ला झाड़ने का प्रयास कर रहे हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी का कहना है कि छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कार्पोरेशन को दवा सप्लाई करनी थी। कार्पोरेशन ही दवा नहीं दे रहा है, ऐसी दशा में वे कहां से सप्लाई करेंगे। दूसरी ओर कार्पोरेशन के अफसरों ने चुप्पी साध ली है, जबकि गर्भवती महिलाआें को आयरन, कैल्शियम अन्य विटामिन की टेबलेट देने का निर्देश केंद्र का है। इसे कार्यक्रम में इसलिए शामिल किया गया है ताकि महिलाओं में खून की कमी हो। प्रसव सुरक्षित हो और शिशु स्वस्थ रहे। गरीब और अशिक्षित परिवार दवाएं नहीं लेते, इसलिए से अस्पतालों से फ्री देने का नियम बनाया गया।



अफसरों की लापरवाही के कारण दवाओं का वितरण बंद हो गया।

क्यों जरूरी है आयरन टेबलेट?

0 शिशु महिला को पूरक आहार मिलता रहे।

0 गर्भवती को खून की कमी हो। महिलाओं में खून की कमी छग की आम समस्या है।

0 गरीब महिलाएं पूरक आहार नहीं ले पातीं, इसलिए आयरन की टेबलेट दी जाती है।

0 आयरन के साथ-साथ फोलिक एसिड कैल्शियम की टेबलेट दी जाती है।

वर्जन

अंबेडकर अस्पताल से आयरन टेबलेट की मांग आई है। कार्पोरेशन के अधिकारियों से बात कर रहे हैं। महिलाओं को आयरन की टेबलेट मिले, इसका प्रयास किया जा रहा है।

डॉ. केआर सोनवानी

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी