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अंबेडकर में दिमाग की फूली नसों का इलाज हुआ आसान

6 वर्ष पहले
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अंबेडकरअस्पताल के एक्सरे विभाग में लगी डीएसए (डिजिटल सब्ट्रेक्शन एंजियोग्राफी) मशीन से दिमाग की फूली नसों का आसानी से इलाज होने लगा है।

यहां इलाज में महज 10 हजार रुपए से तीन लाख रुपए खर्च रहा है। जबकि निजी अस्पतालों में यह खर्च 20 हजार से 10 लाख रुपए तक आता है। बीपीएल स्मार्ट कार्डधारियों का इलाज नि:शुल्क किया जाता है। डीएसए मशीन मरीजों के लिए वरदान साबित हुई है। न्यूरो रेडियोलॉजिस्ट डॉ. चंद्रदेव साहू ने 2012 से अब तक 350 से ज्यादा मरीजों का इलाज कर चुके हैं। सेंट्रल इंडिया के किसी सरकारी अस्पताल में यह पहली मशीन है। कुछ दिनों पहले चेतना साहू के दिमाग का सफल ऑपरेशन किया गया। अब वह पूरी तरह स्वस्थ है। उसका इलाज संजीवनी कोष से किया गया। अब तक 25 से ज्यादा मरीजों का इलाज संजीवनी कोष से किया गया है। डॉ. साहू के अनुसार एम्स दिल्ली, पीजीआई चंडीगढ़, किंग एडवर्ड अस्पताल मुंबई, बेंगलुरू हैदराबाद में ही बिना ऑपरेशन के इलाज किया जा रहा है। पारंपरिक विधि ओपन सर्जरी ‘क्लिपिंग’ रही है इस विधि में मस्तिष्क पेरेनसाइमा के चोटग्रस्त हाेने का खतरा रहता है।

इसके विपरीत एंडोवेस्कुलर का माध्यम अपनाए जाने पर इस तरह का कोई खतरा नहीं रहता है। पैरों की धमनियों के रास्ते से एक सूक्ष्म ट्यूब यानी माइक्रोकेथेटर को वहां ले जाया जाता है और उससे क्षतिग्रस्त हिस्से को बंद कर दिया जाता है। यह ‘क्वाइलिंग’ के नाम से जाना जाता है। इस प्रक्रिया को अपनाए जाने का एक बड़ा फायदा यह है कि इससे मस्तिष्क को कम से कम नुकसान पहुंचता है और इसके परिणाम भी अपेक्षाकृत बेहतर रहे हैं।

ब्रेन हेमरेज से पहले इलाज

एक्सरे विभाग के एचओडी डाॅ. विष्णु दत्त ने बताया कि डीएसए के शुरू होने से ब्रेन हेमरेज से पहले जांच संभव हुआ है। पिछले चार साल में कई मरीजों की फूली हुई नसों का सफल इलाज एवं प्रारंभिक अवस्था में ही पहचान करना आसान हुआ। इलाज की इस नयी तकनीक के माध्यम से ब्रेन हेमरेज का शिकार होने वाले मरीजों की संख्या में अपेक्षाकृत कमी आई है। इसके जरिये सिर, पेट और गुर्दा के किसी भी नस में थक्का जमने की परेशानी को एंजियोग्राॅफी के जरिये पता लगाया जाता है ठीक वैसे ही जैसे हृदय की एंजियोग्राफी की जाती है।

नियमित व्यायाम करें

डॉ. दत्त डॉ. साहू ने बताया कि एन्यूरिज्म से बचने के लिये शारीरिक श्रम जरूरी है। नियमित रूप से व्यायाम करें। डॉक्टर या डाइटीशियन से परामर्श लेकर मोटापे पर नियंत्रण रखना चाहिए। सिगरेट और शराब से परहेज करें। डाइट में फलों और सब्जियों को वरीयता दें। नमक को संतुलित मात्रा में लें।

धमनीस्फीति है एन्यूरिज्म

धमनीस्फीतिया धमनी विस्फार (एन्यूरिज्म) धमनी के स्थानीय उभार को कहते हैं। सामान्य स्थिति में धमनी एक नलिकाकार संरचना होती है। जब धमनी की भित्ति कहीं कमजोर हो जाती है, तब वहाँ खिंचाव होता है और धमनी में प्रवाहित रक्त के दाब के कारण उभार उत्पन्न हो जाता है। यही धमनीस्फीति है। धमनीभित्ति की दुर्बलता के बहुत सामान्य कारण, जन्म से ही विकास में त्रुटि, धमनी भित्ति में चोट या सिफलिस संक्रमण हैं। शरीर की किसी भी धमनी में स्फीति हो सकती है, किंतु बहुतायत से यह महाधमनी, पैरों की प्रमुख धमनियों और मस्तिष्क की धमनियों में पाई जाती है।