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कमल विहार में ठीक होगा रेल के डिब्बे जैसे प्लाट का साइज

7 वर्ष पहले
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रायपुर. कमलविहार में जिन लोगों को अनियमित और बेमेल आकार के प्लाटों का आबंटन रायपुर विकास प्राधिकरण ने किया था। उन सब लोगों को दस दिन के भीतर आवेदन देकर नियमित आकार के प्लाट देने का फैसला लिया गया है। शनिवार को छुट्टी के दिन रायपुर विकास प्राधिकरण के चेयरमैन एसएस बजाज ने अफसरों की आपात कालीन बैठक ली। अफसरों को जबर्दस्त फटकार लगाने के बाद कहा गया कि इतनी महत्वाकांक्षी योजना में आखिर इस तरह की लापरवाही क्यों की जा रही है। प्लाटों का आकार एक समान क्यों नहीं रखा जा रहा है। जिन भी लोगों के अनियमित आकार के प्लाट दिए गए हैं, उनसे आवेदन लेकर नियमित आकार के प्लाटों का आबंटन कर दिया जाए। गौरतलब है कि भास्कर ने ही इस मसले पर खबर लिखी। भास्कर की खबर पढ़ने के बाद लोगों ने मौके पर जाकर अपने प्लाट देखे।



तब पता चला कि एक ही रो में कहीं पर दो हजार वर्गफीट का प्लाट है तो उसी लाइन में 1200 से 1500 वर्गफीट के प्लाट है। प्लाट की गहराई तो समान कर दी गई है, मगर चौड़ाई में अंतर कर दिया गया है। इस बात का खुलासा होते ही आरडीए में हड़कंप सा मच गया। चूंकि योजना में सिर्फ राज्य भर के शहरों के बल्कि उड़ीसा, विदर्भ और मध्यप्रदेश के लोगों ने भी प्लाट लिए हैं। इन सभी जगहों से आरडीए दफ्तर में इंक्वायरी शुरु हो गई है। अनेक शहरों से लोगों के फोन रहे हैं।

प्लानिंग में गड़बड़ी

अफसरों ने इस बात को माना है कि प्लाटों की कटिंग की प्लानिंग में कहीं पर गड़बड़ी हो गई है। अब तक पूरा आरडीए तंत्र एलएनटी के साथ अधोसंरचना के डेवलपमेंट पर ही ध्यान दे रहा था। जबकि प्लाटों की कटिंग आरडीए के प्लानर ने की है। प्लानर ने एक ही लाइन में काटे गए प्लाटों की चौड़ाई को कम और ज्यादा कर दिया। इसकी वजह से कई ऐसे प्लाट भी कटने के बाद लोगों को आबंटित हो गए हैं, जिसकी चौड़ाई मात्र 20 फीट है, जबकि गहराई 70 से 80 फीट तक है। यानी कि पूरा प्लाट रेल के डिब्बे के आकार का हो गया है। इसमें अगल बगल की जमीन छोड़ने के बाद अगर मकान बनाया जाएगा तो तो खिड़की निकल पाएगी ही सही आकार का दरवाजा।