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नगरीय निकाय और पंचायतें तय करेंगी शराब दुकानों की जगह

6 वर्ष पहले
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राज्य के शहरों में अब नगरीय निकाय और गांवों में पंचायतें शराब दुकानों के लिए जगह तय करेंगी। इससे हर शहर में शराब दुकानों के विरोध में होने वाला विवाद थमने की संभावना है। इसके अलावा निकायों और पंचायतों की आय का साधन भी तैयार होगा। हाईवे के किनारे की शराब दुकानों को हटाया जाएगा। यह फैसला शनिवार को हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट में यह भी तय किया गया कि राज्य में इस साल कोई नई शराब दुकान चालू नहीं की जाएगी। पुरानी दुकानों को यथावत रखा जाएगा। यह भी तय किया गया कि शराब से मिलने वाले राजस्व में वृद्धि के लिए अलग-अलग मद में टैक्स की दरों में इजाफा किया जाएगा। राज्य सरकार ने शराब के 2300 करोड़ के राजस्व को 2900 करोड़ रुपए करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यानी सालभर में करीब 600 करोड़ रुपए की वृद्धि की संभावना है। वर्ष 2015-16 के ठेकों की नीलामी भी आँनलाइन ही की जाएगी।इसके अलावा हाउसिंग बोर्ड को अफोर्डेबल आवासीय योजना के तहत अंतरित होने वाली भूमि को पंजीयन और मुद्रांक शुल्क से छूट देगी। इसके अलावा कालोनाइजरों तथा आरडीए तथा एनआरडीए द्वारा कमजोर और अल्प आय वर्ग की कालोनियों की निर्माण के लिए आरक्षित भूमि के हाउसिंग बोर्ड अथवा नगरीय निकायों को हस्तांतरण करने पर स्टाम्प शुल्क पंजीयन शुल्क से छूट दी जाएगी।

राज्य सरकार ने मछुआ सहकारी समितियों के 39 हजार मछुआरा सदस्यों को नदी-नालों में निर्मित एनीकटों और बैराजों में मछली पालन के व्यवसाय रोजगार का प्रस्ताव भी पास किया। कैबिनेट की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार मछुआ सहकारी समितियों को ये एनीकट और बैराज मछली पालन विभाग के संचालनालय द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवंटित किए जाएंगे। मछली पालन नीति में आंशिक संशोधन करके एक हजार हेक्टेयर से ज्यादा जल क्षेत्र वाले सिंचाई जलाशय मत्स्य महासंघ को दिए जाएंगे। महासंघ द्वारा इन्हें निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार नीलाम किया जाएगा।

विदेशी मछलियों पर प्रतिबंध

एकअन्य प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद ने बिग-हेड और विदेशी प्रजाति की मागुर मछलियों के राज्य में प्रजनन, पालन, परिवहन और व्यापार पर प्रतिबंध लगाने का भी निर्णय लिया। विदेशी नस्ल की ये मछलियां चूंकि स्थानीय प्रजातियों की मछलियों को खा जाती हैं, इससे मछलियों की स्थानीय प्रजातियों के विलुप्त होने की आशंका बनी रहती है।