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डालो बोझ जेहन पर कि बचपन टूट जाते हैं.....

6 वर्ष पहले
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रायपुर| शरीरके अधूरेपन के बावजूद जब बच्चों को बैग मिले तो उनके चेहरे पर मुस्कान गई। राजधानी में शनिवार को दानी गर्ल्स स्कूल में करीब पांच दर्जन निशक्त बच्चों का अभिनंदन समारोह हुआ। इसमें बस्तर के ग्रामीण अंचल से भी बच्चे आए थे। सभी बच्चों को स्कूली बस्ते में ड्राइंग बुक, पेंसिल, स्वेटर और टी-शर्ट दी गई। मासूमों के बचपन पर बस्ते का बोझ कम करने की लगातार कई कोशिशें हो रही है मगर तो स्कूली किताबें कम हो रही है और ही बस्ते का बोझ। ऐसे में किसी शायर की ये लाइन याद आती है- डालो बोझ जेहन पर कि बचपन टूट जाते हैं, सिरे नाजुक हैं बंधन के जो अक्सर छूट जाते हैं।