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कमल विहार में लोगों से अन्याय हुआ तो हस्तक्षेप करेगा हाईकोर्ट
लीगल रिपोर्टर| रायपुर-बिलासपुर
हाईकोर्टके जस्टिस प्रशांत मिश्रा की बेंच ने एक अहम आदेश में कहा है कि जहां कहीं भी अन्याय या मनमानी पाई जाती है, वहां कोर्ट को हस्तक्षेप करना चाहिए। हाईकोर्ट ने रायपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) के कमल विहार प्रोजेक्ट में गलती से अधिग्रहित की गई जमीन के एवज में मंजूर अवार्ड को रद्द कर दिया है। साथ ही याचिकाकर्ताओं के पक्ष में योजना के तहत विकसित प्लाॅट आवंटित करने का आदेश दिया गया है।
रायपुर के डूंडा गांव में रहने वाले दशरथ गुप्ता, श्यामसुंदर प्रसाद गुप्ता और राजकुमार गुप्ता की जमीन का अधिग्रहण आरडीए की कमल विहार-4 योजना के लिए किया गया। सहमति के बाद भी भू-अर्जन अधिकारी ने तीनों के पक्ष में अवार्ड पारित कर दिया। योजना के तहत कमल विहार में विकसित प्लाॅट दिए जाने थे। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई। इसमें 26 जून 2012 को पास अवार्ड को रद्द करने और कमल विहार-4 में विकसित किए गए ए-82 और ए-83 नंबर के प्लाॅट को आवंटित करने का निर्देश देने की मांग की गई। आरडीए की ओर से जानकारी दी गई कि आरडीए की मंशा याचिकाकर्ताओं को विकसित प्लाॅट देने की है, लेकिन अवार्ड पास होने के कारण इसमें तकनीकी दिक्कत है। भू-अर्जन अधिकारी के पक्ष में अवार्ड की राशि आरडीए द्वारा जमा की जा चुकी है। वहीं, राज्य शासन की ओर से बताया गया कि अवार्ड पास होने और राशि जमा होने के बाद भू-अर्जन अधिकारी राशि नहीं लौटा सकते। ऐसी स्थिति में एक ही विकल्प बचता है कि वे याचिकाकर्ताओं को मुआवजे का भुगतान करें।