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कामकाजी महिलाओं को दफ्तर में मिलेगी सुरक्षा

6 वर्ष पहले
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राज्यके सरकारी और निजी संस्थानों में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा के लिए अब हर हाल में सभी कार्यालयों में आंतरिक सुरक्षा समिति का गठन अनिवार्य किया जा रहा है। राज्य महिला आयोग ने इस दायरे में अब सरकारी संस्थाओं के साथ निजी संस्थाओं को भी ले लिया है। कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित कंपनी की पहले है, उसके बाद सरकार की। इस भावना को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव किया जा रहा है।

महिला आयोग कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चलाए जाने वाले अभियान की 21 फरवरी से सरगुजा से शुरुआत करने जा रहा है। महिला आयोग की अध्यक्ष लता उसेंडी सदस्य हर्षिता पांडे ने दैनिक भास्कर को बताया कि महिलाओं के साथ कार्यस्थल में होने वाली प्रताड़ना शोषण की शिकायतें मिलने के बाद इस पर अंकुश लगाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। प्रदेश में निर्भया एक्ट-13 का पालन कराने का भी प्रयास होगा। पुलिस डाक्टरों पर एक्ट का पालन करने दबाव बनाया जाएगा। दुष्कर्म पीड़िता का हर पीएचसी में मुलाहिजा प्राथमिक उपचार करने की अनिवार्यता होगी। निजी अस्पतालों में भी पीड़िताओं का मुलाहिजा करना जरूरी है।



ऐसा करने वाले डॉक्टरों नर्सिंग होम के संचालकों को सजा देने का भी प्रावधान है। आयोग ने राज्य में लैंगिक अपराध साइबर क्राइम रोकने की दिशा में पहले ही काम शुरू कर दिया है।

आयोग की सदस्य हर्षिता पांडेय और अध्यक्ष लता उसेंडी।

अब रेस्ट हाउस में नहीं होगी सुनवाई

महिलाआयोग ने पीड़ित महिलाओं के मामलों की शिकायतों पर सुनवाई अब रेस्ट हाउस में करना प्रतिबंधित कर दिया है। उसेंडी का कहना है कि सुनवाई को दौरान रेस्ट हाउस में अदालत की तरह माहौल मिलने पर ऐसा किया गया। पक्षकार भी वहां स्वयं को असहज महसूस करते थे।



अब प्रकरणों की सुनवाई के लिए जिला पंचायतों कलेक्टोरेट दफ्तरों का ही उपयोग किया जाएगा।

राज्य में बनेंगी 146 महिला अदालतें

प्रदेशमें महिलाओं के लिए प्रकरणों की सुनवाई के लिए सरकार 146 ब्लॉकों में महिला अदालतों का गठन करने जा रही है। इसके खाके को अंतिम रूप दिया जा रहा है। राज्य महिला आयोग की पहल पर मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने इसे सैद्धांतिक मंजूरी दी है। जल्द ही इसे संवैधानिक रूप प्रदान करने केबिनेट के बाद विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा। सभी 27 जिलों के 146 ब्लॉकों में इसका गठन होगा। एक अदालत में करीब 20 मेंबर होंगे। इनमें 5 सरकारी और 15 गैरसरकारी होंगे।



इसका नोडल विभाग महिला बाल विकास विभाग होगा। अदालत के मेंबर वकील, कानून के जानकार, महिला विशेषज्ञ, समाजसेवी, सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारी, पुलिस संबंधित लोग बनाए जाएंगे।