उपासने को संगठन, प्रमोद को छवि का लाभ
प्रमोद दुबे
सच्चिदानंद उपासने
राजधानी के महापौर पद के लिए भाजपा के उम्मीदवार सच्चिदानंद उपासने और कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद दुबे, दोनों ही के लिए मुकाबला आसान नहीं होगा। टिकट की घोषणा के फौरन बाद शहर में दोनों उम्मीदवारों का आकलन शुरु हो गया है। उपासने को राजधानी में भाजपा के मजबूत संगठन तथा 2008 में विधानसभा चुनाव लड़ने के अनुभव का फायदा मिलेगा, जिसमें वे बहुत कम वोटों से हारे थे। वहीं प्रमोद को उनकी छवि तथा छात्र जीवन से ही राजधानी में सक्रिय रहने का लाभ मिल सकता है।
ताकत
1.छात्र राजनीति से राजधानी में सक्रिय, इसलिए खुद का बड़ा नेटवर्क।
2. तीन बार अलग वार्डों से पार्षद, लोकल चुनाव का यह बड़ा अनुभव।
3. निगम में एमआईसी मेंबर होने के कारण पांच साल रहा सीधा संपर्क।
कमजोरी
1.बिखरा कांग्रेस संगठन, चुनाव के लिए एकजुट नहीं होने का रिकार्ड।
2. पार्टी के बड़े और प्रभावशाली नेताओं को साथ लाना बड़ी चुनौती।
3. पश्चिम और उत्तर विस क्षेत्रों के वार्डों में भितरघात की आशंकाएं।
ताकत
1.भारतीय जनता पार्टी का एकजुट संगठन तथा चुनाव की पूर्व तैयारी।
2. सरल और सौम्य चेहरा तथा पूर्व में विस चुनाव लड़ने का अनुभव।
3. राजधानी में भाजपा सरकार की ओर से कराए गए विकास कार्य।
कमजोरी
1.टिकट में सक्रिय नेताओं की अनदेखी, उनकी नाराजगी भी संभव।
2. विस में पराजय के बाद संगठन में सक्रियता ज्यादा पर क्षेत्र में कम।
3. निरस्त राशन कार्ड और नसबंदी कांड से लोगों में उपजी नाराजगी।