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दोनों पल्लों में गैप नहीं, कुंडी बीच में तो चोरों के लिए तोड़ना मुश्किल

7 वर्ष पहले
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समता कालोनी में एक करोड़ की सनसनीखेज चोरी करने वालों ने पुलिस के सामने चौंकाने वाले राज खोले हैं। रायपुर में पिछले दो साल में 30 से अधिक चोरियां करने वाले गिरोह ने पूछताछ में पुलिस अफसरों को बताया कि किस तरह के दरवाजे-खिड़कियों वाले मकानों में आसानी से बड़ी चोरियां करने में कामयाब रहे। गिरोह ने ये भी बताया कि कुछ मकानों में दरवाजे-खिड़कियां तथा सुरक्षा के दूसरे उपाय ऐसे थे कि गिरोह के घुसने में सिर्फ खासी परेशानी हुई बल्कि कुछ जगह से तो हाथ साफ किए बिना ही लौटना पड़ा।

भास्कर टीम ने क्राइम ब्रांच और पुलिस के कई अफसरों से बातचीत की तथा चोरी के पैटर्न का अध्ययन किया। एएसपी क्राइम तथा अन्य अफसरों के मुताबिक अलग गिरोहों के पैटर्न अलग हैं। इन गिरोहों ने पूछताछ में बताया कि मकान में लगने वाले दरवाजे और खिड़कियों में दोनों पल्लों के गैप, सिटकिनी, कुंडी, ताले और ग्रिल लगाने के तरीके में थोड़ी सी चूक चोरों का काम आसान कर रही है। जहां सीसीटीवी और सुरक्षा गार्ड लगे हों, वहां चोर गिरोहों की दिक्कतें और बढ़ जाती हैं। अगर लोग अपने घर की सुरक्षा को लेकर थोड़ी सतर्कता दिखाएं तो वे चोरी की आशंका को कम कर सकते हैं।

कबीरनगर में बगल में सूना मकान देख की गई दोनों चोरी : राजधानीके कबीर नगर में पिछले पांच दिन के अंदर दिनदहाड़े की गई दोनों चोरी के मामले में क्राइम ब्रांच की टीम पड़ताल कर रही है। दोनों घटना का मुआयना करने के दौरान पुलिस ने पाया कि जिन दोनों मकानों में चोरी की गई, उसके बगल के घर में कोई नहीं रह रहा था। सूने मकान के जरिये ही चोर दोनों मकान में आए और वहां वारदात को अंजाम दिया। पुलिस को दोनों मकान के बगल के घर में चोरों के आने-जाने के निशान मिले हैं। कबीर नगर में पांच दिन पहले एनआईटी के प्रोफेसर डॉ. राजेश त्रिपाठी के डुप्लेक्स मकान से लगभग सात लाख रुपए की चोरी की गई। शुक्रवार को संजीव त्रिपाठी के मकान में दरवाजे से घुसकर 2.80 लाख रुपए की चोरी की गई थी।

थोड़ी से सतर्कता से रोकी जा सकती है चोरी

^राजधानी में पिछले कुछ सालों के दौरान हुई चोरी को लेकर अलग-अलग तरह के पैटर्न अपनाए जा रहे हैं। चोरों से की पूछताछ में एक बात सामने आई है कि लोगों द्वारा बरती गई थोड़ी सी चूक के कारण वारदात को अंजाम देना आसान रहा। लोग अपने स्तर पर थोड़ी सी सतर्कता बरतें तो वारदातों में कमी सकती है