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मनुष्य के कर्म से ही बनते हैं भाग्य : पंडित कृष्णा
रायपुर. मनुष्यका शरीर कई जन्मों के बाद विभिन्न योनियों के निकलने के बाद मिलता है, इसे व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। संसार में मनुष्य जीवन पाना दुर्लभ है। देवी देवता भी पृथ्वीलोक में आने के लिए मनुष्य के रूप में जन्म लेने के लिए तपस्या करते हैं।
पाप और अनैतिक कार्य करना ही दुख का परिणाम है। प्राणियों पर शारीरिक और मानसिक रूप से किए जाने वाले अत्याचार के बाद भी सुख की कामना करना व्यर्थ है। क्योंकि मनुष्य के कर्म ही उसके भाग्य बनाते हैं। यह संदेश बेलगांव (साजा) में आयोजित भागवत कथा में पं कृष्णा प्रसाद शुक्ला ने सत्संग में सुनाया। मनुष्य योनि में ही अच्छे कार्य करने के साथ परलोक में जीवन को सफल बनाया जा सकता है। मानव जीवन में भक्ति के साथ सत्कर्म का होना आवश्यक है। जब कभी संसार में धर्म के साथ अन्याय हुआ है, पापियों का आतंक बढ़ा है, तब-तब भगवान ने अपने विभिन्न रूपों में अवतार लेकर दुष्टों का नाश कर संसार को पाप से मुक्ति किया है। कलयुग के आने पर अच्छे कर्मों का प्रभाव कम और पाप का घड़ा भरेगा।
उच्च वर्ग के लोग निम्न स्तर के काम करेंगे। संसार में विश्वसनीयता के नाम पर कुछ नहीं बचेगा। धर्म का केवल नाश होता रहेगा। ऐसे में भगवान के कलकी अवतार का जन्म होगा। इसका उल्लेख भगवान के अवतारों में शामिल है।